
समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट से क्या हैं मांग? केंद्र क्यों है सख्त... 5 बड़े सवालों के जवाब
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समलैंगिक विवाह पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार से सुनवाई होगी. ये सुनवाई पांच जजों की संवैधानिक बेंच करेगी. इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफनामा दायर कर सभी याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है. साथ ही ये भी कहा कि इस पर फैसला लेने का अधिकार अदालत को नहीं है.
पुरुष से पुरुष और स्त्री से स्त्री की शादी को कानूनी मान्यता दी जाए या नहीं? इस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच सुनवाई करेगी.
लेकिन इस सुनवाई से ठीक पहले केंद्र सरकार ने एक बार फिर समलैंगिक विवाह का विरोध किया है. केंद्र ने हलफनामा दायर कर सभी याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है. केंद्र ने कहा कि शादियों पर फैसला सिर्फ संसद ही ले सकती है, सुप्रीम कोर्ट नहीं.
13 मार्च को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले को पांच जजों की संवैधानिक बेंच को ट्रांसफर कर दिया था.
अब इस मामले पर सीजेआई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस रविंद्र भट, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच 18 अप्रैल से सुनवाई करेगी.
1. क्या है मामला?
- दिल्ली हाईकोर्ट समेत अलग-अलग अदालतों में समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग को लेकर याचिकाएं दायर हुई थीं.

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