
संसद में मणिपुर पर घमासान, सरकार ने सदन चलाने के लिए अब तैयार किया नया प्लान, विपक्ष ने भी बुलाई बैठक
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संसद में मणिपुर पर चर्चा को लेकर विपक्ष पीएम के बयान की मांग पर अड़ा हुआ है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री पहले बयान दें, फिर हम चर्चा शुरू करेंगे. तो इस पर सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि मणिपुर पर गृहमंत्री अमित शाह ही बोलेंगे.
मणिपुर के मुद्दे को लेकर संसद में गतिरोध जारी है. संसद की कार्यवाही हर रोज शुरू होने के कुछ देर बाद ही हंगामे के चलते स्थगित हो जाती है. हंगामे की वजह मणिपुर का मुद्दा ही है. गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि सरकार मणिपुर पर चर्चा को तैयार है. इस मामले को लेकर दोनों ही पक्षों का एक दूसरे पर यही आरोप है कि वे सदन की कार्यवाही को चलने नहीं दे रहे हैं. ऐसे में अब दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, टीएमसी के सुदीप बंधोपाध्य और डीएमके के टीआर बालू से विपक्ष के शीर्ष नेताओं से फोन पर बात की है. वहीं पीएम मोदी ने इस मुद्दे को लेकर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक भी की है.
'पीएम नहीं होम मिनिस्टर ही देगें जवाब'
अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मिलकर स्पष्ट कर दिया कि सरकार मणिपुर की घटना पर चर्चा के लिए तैयार है. इस मामले को लेकर विपक्ष पीएम के बयान पर अड़ा हुआ है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री पहले बयान दें, फिर हम चर्चा शुरू करेंगे. तो इस पर सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि मणिपुर पर गृहमंत्री अमित शाह ही बोलेंगे. सरकारी सूत्रों के मुताबिक मणिपुर में पहले भी इससे भयानक हिंसा हो चुकी है. साल 1993 और 1997 में हुई हिंसा पर एक बार तो संसद में चर्चा ही नहीं हुई और एक बार गृह राज्य मंत्री ने बयान दिया था.
विपक्ष की चुनावी मजबूरी
सरकार का मानना है तब किसी गृहमंत्री ने राज्य का दौरा तक नहीं किया था और संसद में चर्चा के दौरान पीएम ने हस्तक्षेप किया था. सूत्रों के मुताबिक सरकार संसद में अपने जवाब को केवल मणिपुर तक सीमित रखेगी, विपक्षी राज्यों में हो रही हिंसा का जिक्र नहीं होगा. सरकार को यह भी लगता है कि विपक्ष अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा. इसके पीछे विपक्ष की चुनावी मजबूरी है.

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