
संसद में अब सत्ता पक्ष ही नहीं, आसन भी होगा विपक्ष के निशाने पर... पहले सत्र से निकले ये संकेत
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संसद सत्र के दौरान लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक, विपक्ष और आसन के बीच तल्खी भी नजर आई. संसद के पहले सत्र ने संकेत कर दिया है कि संसद में विपक्ष के निशाने पर सत्ता पक्ष ही नहीं, इस बार आसन भी होगा.
लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही यह माना जा रहा था कि इस बार सत्ता पक्ष के लिए खुले मैदान जैसी स्थिति नहीं होगी, उसे विपक्ष की चुनौती से जूझना होगा. संसद का बजट सत्र आने वाला है लेकिन उससे पहले संपन्न हुए विशेष सत्र के दौरान समीकरण बदले-बदले नजर आए. संख्याबल के लिहाज से सत्ता पक्ष भले ही सबकुछ अपने मुफीद होने का दावा कर रहा हो, किसी दबाव में नहीं झुकने की बात कह रहा हो लेकिन ये बदले समीकरण दूरगामी संदेश देते हैं.
लोकसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण से लेकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा तक, विपक्ष ने आक्रामक तेवर दिखाए. लोकसभा चुनाव में संख्याबल के तराजू पर विपक्ष की मजबूती के बाद ये संभावित भी था लेकिन संसद के दोनों सदनों में कई मौके ऐसे भी आए जब मामला स्पीकर या सभापति बनाम होता नजर आया. संसद का पहले सत्र ने ये संकेत कर दिया है कि विपक्ष के निशाने पर केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, आसन भी निशाने पर होगा.
विपक्ष ने सांसदों को शपथ दिलाने के लिए प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति पर सवाल उठाकर, सांसदों को शपथ दिलाने में उनकी सहायता से इनकार करके ये संदेश दे दिया था कि इस बार आसन के लिए भी सदन का संचालन आसान नहीं रहने वाला. स्पीकर चुनाव की बात आई तो पक्ष-विपक्ष में सहमति नहीं बन सकी. नतीजा ये रहा कि विपक्ष ने संख्याबल के लिहाज से हार सुनिश्चित देख भी उम्मीदवार उतार दिया. दशकों बाद स्पीकर चुनने के लिए मतदान हुआ. ओम बिरला ध्वनिमत से लगातार दूसरी बार स्पीकर चुन लिए गए, लेकिन इतिहास के पन्नों में यह भी दर्ज होगा कि उनके खिलाफ विपक्ष ने के सुरेश को उम्मीदवार उतारा था.
अपने पहले कार्यकाल में आम सहमति से स्पीकर चुने गए ओम बिरला को दूसरी बार इस आसन तक पहुंचने के लिए विपक्ष की चुनौती से पार पाना पड़ा. ओम बिरला के स्पीकर चुन लिए जाने के बाद संसदीय परंपरा के मुताबिक फ्लोर लीडर्स की ओर से उनको बधाई देने का सिलसिला शुरू हुआ. नेता सदन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों के फ्लोर लीडर्स जहां ओम बिरला को निष्पक्ष अध्यक्ष बताते नजर आए तो वहीं विपक्षी दलों ने बधाई देने के मौके से ही निष्पक्षता का सवाल उठाते हुए स्पीकर को अपने संख्याबल का एहसास कराना शुरू कर दिया.
बधाई संदेशों से ही विपक्ष ने दिखा दिए तेवर
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्पीकर चुने पर ओम बिरला को बधाई देते हुए कहा कि सरकार के पास ज्यादा पॉलिटिकल पावर है लेकिन विपक्ष भी भारत का प्रतिनिधित्व करता है. हमें भरोसा है कि आप हमारी आवाज उठाने देंगे. विपक्ष की आवाज दबाना अलोकतांत्रिक है. वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने निष्पक्षता को इस महान पद की महान जिम्मेदारी बताते हुए यह भी कह दिया- किसी भी जनप्रतिनिधि के निष्कासन जैसा न हो. किसी भी जनप्रतिनिधि की आवाज नहीं दबाई जानि चाहिए. आपके इशारे पर सदन चले, इसका उल्टा न हो.

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