
संकट, संयम और 41 जिंदगियों का साहस... पहाड़ के चेहरे पर सुरंग का मुहाना कितनी जद्दोजहद से खुला
AajTak
उत्तराखंड में पहाड़ के चेहरे पर सुरंग का मुहाना कितनी जद्दोजहद के बाद खुला है, यह सिर्फ रेस्क्यू टीम के जांबाज जानते हैं. पहाड़ी इलाके में जहां वाहन बमुश्किल चल पाते हैं, वहां रेस्क्यू के लिए भारी भरकम मशीनें पहुंचाकर 24 घंटे जिंदगियां बचाने की जंग लड़ी गई और जीत हासिल की. यह जीत संकट के समय में संयम और साहस की बड़ी मिसाल है.
उत्तराखंड में सिल्क्यारा सुरंग से रेस्क्यू किए गए 41 श्रमवीरों का संयम, साहस सराहनीय है. इतनी मुश्किल घड़ी में भी हौसला नहीं खोया और आखिर पहाड़ के सीने में सुराख कर सभी को निकाल लिया गया. इस रेस्क्यू की राह में कई मुश्किलें आईं, लेकिन रेस्क्यू टीम के जांबाजों ने हार नहीं मानी. वे 24 घंटे जुटे रहे. पहाड़ के जिस दुर्गम इलाके में वाहन मुश्किल से चल पाते हैं, वहां इतनी बड़ी मशीनें पहुंचा दी गईं और एक साथ कई प्लान पर काम किया गया.
जब मौके पर मौजूद मशीनों से काम नहीं हो सका तो दिल्ली से अमेरिकन ऑगर मशीन ले जाई गई. ऑगर मशीन के जरिये पहाड़ के सीने में सुराख करके जिंदगियां बचाने की जंग लड़ी. इसमें दिक्कत आई तो दूसरे तरीके अपनाए गए.
दरअसल, सिलक्यारा की इस सुरंग के अंदर 41 जिंदगियां बचाने के लिए जितनी जद्दोजहद हुई है, वो सिर्फ रेस्क्यू टीम के जांबाज ही जानते हैं. पहाड़ का वो इलाका जहां बड़े वाहन भी मुश्किल से चल पाते हैं, वहां सैकड़ों क्विंटल भारी मशीनरी को सुरंग के मुहाने तक पहुंचाना अपने आप में एक जंग थी. रेस्क्यू टीम ने युद्धस्तर पर सुरंग तक हर वो सहूलियत पहुंचाई, जिसकी जरूरत बताई गई.
12 नवंबर को धंस गई थी सुरंग, रेस्क्यू शुरू होते ही हो गया था ब्रेकडाउन
12 नवंबर को सुरंग धंसने के बाद जब मौके पर मौजूद सहूलियतों से रेस्क्यू शुरू किया गया तो चंद घंटे में ही मशीन ब्रेकडाउन हो गया था. रेस्क्यू टीम ने बड़ी मशीन की दरकार बताई. फौरन वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से अमेरिकन ऑगर मशीन उत्तरकाशी पहुंचाई गई. पहाड़ के सीने में सुराख करके उसका मलबा सैकड़ों फीट बाहर तक फेंकने में सक्षम ये मशीन कोई मामूली मशीन नहीं थी.

पश्चिमी एशिया में युद्ध के बीच भारत की चिंताएं तेल और गैस सप्लाई को लेकर बढ़ी हुई हैं. प्रधानमंत्री ने ताजा हालात की जानकारी सदन में बोलते हुए देश को दी. अब आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्तव्य भवन-2 में अहम बैठक की है. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे, जिन्होंने होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चर्चा की. देखें वीडियो.

पश्चिम एशिया के हालात सुधरते नहीं दिख रहे..ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर 5 दिनों तक हमला ना करने की हामी जरूर भरी है लेकिन अब भी हमले थमे नहीं है. पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए भारत ने भी अपनी तैयारी मुकम्मल कर रखी है. राजनाथ सिंह ने एक हाईलेवल मीटिंग बुलाकर तैयारी की समीक्षा की. तो भारतीय एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा के लिए भारतीय युद्धपोत हॉर्मुज पहुंच चुके हैं. पीएम मोदी ने कल लोकसभा में साफ कह दिया था कि तेल सप्लाई में रुकावट या नागरिकों और पावर प्लांट पर हमला मंजूर नहीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान जंग पर राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है. इसने पूरे विश्व को गंभीर ऊर्जा संकट में डाल दिया है. इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उनके जीवन की रक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है. होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हैं. उनके क्रू मेंबर्स भी अधिकतर भारतीय हैं. यह भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जरूरी है कि भारत के इस उच्च सदन से दुनिया में संवाद का संदेश जाए. हम गल्फ के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमने डीएस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी लगातार बात की है. भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है.










