
श्रीराम और सीता का स्वरूप धारण करने शालिग्राम शिलाएं नेपाल से रवाना, इन शहरों से गुजरकर पहुंचेंगी अयोध्या
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नेपाल की काली गंड़की नदी से मिली दो विशालकाय शालिग्राम शिलाएं जनकपुर में विधिवत पूजन के बाद अयोध्या के लिए रवाना हो गईं. जनकपुर में रात्रि विश्राम के बाद 29 जनवरी को सुबह महाआरती और विजय महामन्त्र के जाप के साथ परिक्रमा कर इन शिलाओं को 30 जनवरी को अयोध्या के लिए रवाना किया जाएगा.
नेपाल की काली गंड़की नदी से मिली दो विशालकाय शालिग्राम शिलाएं जनकपुर में विधिवत पूजन के बाद अयोध्या के लिए रवाना हो गईं. इन शिलाओं से अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर में रामलला और देवी सीता के लगभग पांच फुट ऊंचे श्री विग्रह यानी मूर्तियों का निर्माण होगा.
पूरी दुनिया में भगवान विष्णु के रूप में पूजित शालिग्राम शिलाएं सिर्फ गंडकी नदी के नेपाल वाले हिस्से में ही मिलती हैं. ये प्राकृतिक घटना वैसी ही है, जैसे शिव स्वरूप पूजित नर्मदेश्वर शिलाएं नर्मदा नदी के होशंगाबाद, खरगोन इलाके में ही मिलती हैं.
शालिग्राम शिलाएं सैकड़ों साल पानी में रहने, बहने के बाद बनती हैं. इनका निर्माण इन शिलाओं में मौजूद एक विशेष कीट के चलते होता है. रामलला और सीता जी की प्रतिमा के लिए ये विशालकाय शिलाएं मुक्तिनाथ क्षेत्र के म्याग्दी जिले के बेनीबाजार के पास काली गंडकी नदी की धार से निकाली गई हैं. एक शिला सात से साढ़े सात फुट लंबी औऱ चार फुट चौड़ी है. एक शिला का वजन 26 टन है, जबकि दूसरी शिला का वजन 14 टन है.
इन शिलाओं को गंडकी की धार से निकाला गया. इसके बाद काली गंड़की नदी की पूजा कर क्षमा याचना की गई. इसके बाद 26 जनवरी को गलेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक किया गया. इसके बाद पोखरा के विंध्यवासिनी मंदिर में पूजाकर जनकपुर रवाना किया गया. जनकपुर तक पहुंचने के लिए तीन दिन की यात्रा होगी.
नेपाल के जनकपुर स्थित जानकी मंदिर से जुड़े लोगों ने श्रीराम के लिए धनुष बनाने की इच्छा जताई है. इस संदर्भ में पिछले साल 30 जुलाई को नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विमलेंद्र निधि और जानकी मंदिर जनकपुर के महंत रामतपेश्वर दास के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अयोध्या जाकर चंपत राय, स्वामी गोविंददेव गिरि और निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा से मुलाकात की थी.
जनकपुर के रास्ते में 28 जनवरी की सुबह पूजा के बाद नेपाल के शहर हेटौड़ा, पथलैया, निजगढ़, लालबंदी, बर्दिबास में पूजा विधान पूरे करते हुए शिलाएं ढल्केबर पहुंचेंगी. जनकपुर में रात्रि विश्राम के बाद 29 जनवरी को सुबह महाआरती और विजय महामन्त्र के जाप के साथ परिक्रमा कर इन शिलाओं को 30 जनवरी को अयोध्या के लिए रवाना किया जाएगा.

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