
शंघाई-बीजिंग में कोरोना से हाहाकार, कैद में लोग... घर से निकलने, सामान की डिलीवरी लेने पर भी रोक
AajTak
Corona virus in China: चीन में 9 मई को कोरोना के 3,475 नए केस सामने आए. यहां 357 लोगों में कोरोना के लक्षण पाए गए हैं. जबकि 3118 लोग ऐसे हैं, जिनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं मिला है. इससे पहले शुक्रवार को चीन में कोरोना के 4333 केस सामने आए थे, इनमें से 415 लोगों में कोरोना के लक्षण मिले थे. चीन में अब तक 5191 लोगों की मौत हो चुकी है.
चीन में कोरोना का कहर जारी है. देश के दो सबसे बड़े शहरों में सोमवार को कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए प्रतिबंध और कड़े कर दिए गए. इसके चलते यहां जनता में आक्रोश फैल गया. इतना ही नहीं चीन की कोरोना के खिलाफ जीरो कोविड पॉलिसी पर भी सवाल उठने लगे हैं.
शंघाई में लगातार 6 हफ्तों से लॉकडाउन जारी है. बताया जा रहा है कि यहां संक्रमण को रोकने के लिए प्रतिबंधों को और कड़ा किया गया है. हालांकि, इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. बताया जा रहा है कि शंघाई के 16 जिलों में से चार में लोगों को सप्ताह के आखिर में नोटिस दिया गया है कि वे अपने घरों से बाहर नहीं जा सकते, न ही डिलीवरी ले सकते हैं. हालांकि, इससे पहले लोगों को घरों के बाहर रेजिडेंटल एरिया में घूमने की इजाजत थी.
उधर, रविवार को लगाए गए नए प्रतिबंधों का विरोध भी तेज हो गया है. शंघाई की रहने वाले कोको वांग ने कहा, यह जेल की तरह है. हमें कोरोना वायरस से नहीं, नीतियों से डर लगता है.
बीजिंग में भी कड़े हुए प्रतिबंध इसी बीच, बीजिंग में भी अब तक सबसे गंभीर प्रतिबंधों का ऐलान किया गया है. यहां के दक्षिण-पश्चिम में सोमवार को सभी नागरिकों से बाहर निकलने के लिए मना कर दिया गया. इतना ही नहीं वायरस को फैलने से संबंधित सभी गतिविधियों की भी मनाही की गई है.
इसके अलावा बीजिंग में अन्य इलाकों में लोगों से वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया है. कुछ रेस्टोरेंट और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी बंद कर दिया गया है. इतना ही नहीं कई इमारतों और पार्क को भी सील कर दिया गया है.
चीन की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा असर बताया जा रहा है कि चीन के कड़े प्रतिबंधों का असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है. सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन की निर्यात वृद्धि लगभग दो वर्षों में सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच गई है. इतना ही नहीं चीन के अन्य बिजनेस पर भी कोरोना का असर पड़ा है.

पश्चिमी एशिया में युद्ध के बीच भारत की चिंताएं तेल और गैस सप्लाई को लेकर बढ़ी हुई हैं. प्रधानमंत्री ने ताजा हालात की जानकारी सदन में बोलते हुए देश को दी. अब आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्तव्य भवन-2 में अहम बैठक की है. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे, जिन्होंने होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चर्चा की. देखें वीडियो.

पश्चिम एशिया के हालात सुधरते नहीं दिख रहे..ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर 5 दिनों तक हमला ना करने की हामी जरूर भरी है लेकिन अब भी हमले थमे नहीं है. पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए भारत ने भी अपनी तैयारी मुकम्मल कर रखी है. राजनाथ सिंह ने एक हाईलेवल मीटिंग बुलाकर तैयारी की समीक्षा की. तो भारतीय एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा के लिए भारतीय युद्धपोत हॉर्मुज पहुंच चुके हैं. पीएम मोदी ने कल लोकसभा में साफ कह दिया था कि तेल सप्लाई में रुकावट या नागरिकों और पावर प्लांट पर हमला मंजूर नहीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान जंग पर राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है. इसने पूरे विश्व को गंभीर ऊर्जा संकट में डाल दिया है. इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उनके जीवन की रक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है. होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हैं. उनके क्रू मेंबर्स भी अधिकतर भारतीय हैं. यह भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जरूरी है कि भारत के इस उच्च सदन से दुनिया में संवाद का संदेश जाए. हम गल्फ के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमने डीएस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी लगातार बात की है. भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है.










