
'विपक्ष को विरोध का अधिकार, सरकार को उसे स्वीकार करना चाहिए', बोले नितिन गडकरी
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Agenda AajTak 2022: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एजेंडा आजतक 2022 में विपक्ष और राहुल गांधी पर अपनी बिल्कुल अलग राय रखी. उन्होंने कहा कि हमें विपक्ष की टीका-टिप्पणियों को स्वीकार करना चाहिए. वहीं भारत जोड़ो यात्रा को लेकर उन्होंने कहा कि हर किसी को मेहनत करने का अधिकार है.
Agenda AajTak 2022: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को एजेंडा आजतक 2022 में देश विपक्ष और राहुल गांधी पर बात. कार्यक्रम में राहुल गांधी के सद्दाम हुसैन जैसे लुक वाले असम के सीएम हेमंत बिस्व सरमा के बयान पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वे इस विवाद में नहीं पड़ना चाहता. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष में हैं और लोकतंत्र के यशस्वी होने के लिए जितनी रूलिंग पार्टी जरूरी है, उनका ही जरूरी विपक्ष है. उन्होंने कहा कि टीका-टिप्पणी करना विपक्ष का अधिकार होता है और रूलिंग पार्टी को उसे पूरी टॉलरेंस के साथ स्वीकार करना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि जहां तक राहुल गांधी की बात है. उनकी पार्टी विपक्ष में है. उन्हें जनता ने जिम्मेदारी दी है. उन्हें अच्छे विपक्ष का काम करना चाहिए.राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पर उन्होंने कहा कि हर आदमी को मेहनत करने का अधिकार है. जिसमें जितनी ताकत है, आजमा लो... यह लोकतंत्र है. वह बोले- अटलजी कहा करते थे कि हममें मतभेद हो सकता है लेकिन मनभेद नहीं.
इसके बाद अरविंद केजरीवाल बीजेपी के लिए कितना खतरा हैं, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि बड़े बनने की दो ही रेखा होती है. एक अपनी रेखा बड़ी कर लो या दूसरे की मिटा. मैं अपनी रेखा बड़ी करने पर विश्वास करता हूं. राहुल क्या कर रहे हैं, कौन यात्रा निकाल रहा है, कौन बैंड बजा रहा है, मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता. मैं अपना काम करता हूं. अपना काम लेकर जनता के पास जाऊंगा, अगर उन्हें मेरा काम समझ में आएगा तो मुझे दोबारा मौका दिया जाएगा.
एक शादी तो ठीक है लेकिन चार अस्वाभाविक है...
यूनिफॉर्म सिविल कोड पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विदेश में मुस्लिम देश में में कौन सा कोड लागू है? क्या किसी मुस्लिम देश में दो कोड हैं? क्या महिलाओं के साथ समान अधिकार नहीं होने चाहिए? क्या भारत के संविधान के मौलिक अधिकारों में महिलाओं के साथ भेदभाव किया है? उन्होंने कहा कि एक महिला से शादी करना तो ठीक है लेकिन चार शादियां करना अस्वाभाविक है. इसीलिए मुस्लिम समाज में भी जो शिक्षित वर्ग है, जो प्रोग्रेसिव लोग हैं वे एक ही शादी करते हैं.
उन्होंने कहा कि समाज में जो अच्छी बात है, उसे स्वीकार करना चाहिए ताकि गुणात्मक बदलाव आ सके. यह किसी धर्म-संप्रदाय के विरोध में नहीं है. मेरा मानना है कि इस तरह के मुद्दों पर राजनीति का चश्मा उतार कर मानवता के आधार पर उसका मूल्यांकन करना चाहिए और तभी हमें उसके मायने समझ में आएंगे.

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