
'वक्फ प्रॉपर्टी का उपयोग सिर्फ मुसलमानों नहीं हिंदुओं के कल्याण के लिए भी हो', JPC में बोलीं मुस्लिम महिलाएं
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मुस्लिम महिला बुद्धिजीवियों के समूह ने इस बात पर भी जोर दिया कि वक्फ बोर्ड को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने अब तक विशेष रूप से अनाथों, तलाकशुदा महिलाओं और विधवाओं के कल्याण के लिए कौन से कार्य किए हैं. उन्होंने जमीन कब्जाने वालों के खिलाफ वक्फ बोर्ड द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी.
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर जेपीसी की बैठक में मुस्लिम महिला बुद्धिजीवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने समिति के सदस्यों के सामने तीन घंटे तक प्रेजेंटेशन दिया. जेपीसी ने पहली बार बिल पर अपने विचार और सुझाव साझा करने के लिए शालिनी अली के नेतृत्व में एक मुस्लिम महिला प्रतिनिधिमंडल को आमंत्रित किया था.
सूत्रों ने आजतक को बताया कि मुस्लिम महिलाओं ने जेपीसी की बैठक में कहा कि वक्फ संपत्तियों के माध्यम से लोगों का कल्याण केवल मुस्लिम समुदाय तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे हिंदुओं तक भी बढ़ाया जाना चाहिए. क्योंकि कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि वक्फ केवल मुसलमानों के लिए है.
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महिला बुद्धिजीवियों ने वक्फ बोर्ड की निगरानी में देश भर के मदरसों के पूर्ण ऑडिट की मांग की ताकि बोर्ड के कामकाज में वित्तीय पारदर्शिता हो. महिलाओं के समूह ने प्रस्तावित संशोधनों का स्वागत किया लेकिन इस बात पर जोर दिया कि ये केवल कागज पर लिखे शब्दों से कहीं अधिक होने चाहिए.
उन्होंने जेपीसी को बताया कि पिछले प्रावधानों में पहले से ही वक्फ बोर्डों में महिलाओं को शामिल किया गया था, लेकिन इसे कभी अमल में नहीं लाया गया. मुस्लिम महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने जेपीसी की बैठक में कहा कि वे इस बार ठोस कार्रवाई और पारदर्शिता चाहती हैं.
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