
लोहिया, अंबेडकर, चौधरी चरण सिंह और मुलायम की विचारधारा के जरिए सपा की नई सोशल इंजीनियरिंग
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मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पहली बार हो रहे इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी में समाजवादी पार्टी डॉ. राममनोहर लोहिया के बाद मुलायम सिंह को सबसे बड़े नेता के तौर पर आगे रखेगी. इसीलिए डॉ. लोहिया, मुलायम, अंबेडकर और चौधरी चरण सिंह के पोस्टरों के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी का आगाज करेगी.
उत्तर प्रदेश की सियासत में बीजेपी को मात देने के लिए सपा कई तरह के सियासी प्रयोग करके देख चुकी है, लेकिन अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी. सपा प्रमुख अखिलेश यादव राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिवसीय बैठक कोलकाता में करने जा रहे हैं, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव की रूपरेखा तैयार होगी. चुनावी रणनीति के तहत समाजवादी पार्टी लोहिया, डा. भीमराव अंबेडकर, चौधरी चरण सिंह और मुलायम सिंह यादव के सिद्धांतों को जरिए आगे बढ़ेगी और अखिलेश यादव इसी बहाने नई सोशल इंजीनियरिंग को अमलीजामा पहनाने की कवायद है?
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद पहली बार हो रहे इस राष्ट्रीय कार्यकारिणी में समाजवादी पार्टी डॉ. राममनोहर लोहिया के बाद मुलायम सिंह को सबसे बड़े नेता के तौर पर आगे रखेगी. इसीलिए डॉ. लोहिया, मुलायम, अंबेडकर और चौधरी चरण सिंह के पोस्टरों के साथ राष्ट्रीय कार्यकारिणी का आगाज करेगी. कोलकाता में 17, 18 और 19 मार्च तक चलने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सपा मिशन-2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाएगी. साथ ही पार्टी की रीति-नीति में बदलाव पर भी चर्चा की संभावना है.
अखिलेश यादव को तीसरी बार समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है, जिसके बाद उन्होंने अपने टीम का गठन भी कर लिया है. सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दलित और ओबीसी नेताओं को खास तवज्जो दी गई है. इतना ही नहीं सपा ने अपने कोर वोट बैंक यादव-मुस्लिम समीकरण के साथ-साथ बसपा से आए अंबेडकरवादी नेताओं को भी खास तवज्जो देकर राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की है. इस फॉर्मूले को सपा ने आगे बढ़ाने और उसके लिए फोकस ग्रुप को तैयार करने के साथ-साथ उसे अमलीजामा पहनाने के लिए अभियान चलाने की रणनीति बनाएगी.
नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिश
सपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिस तरह से लोहिया, चरण सिंह व मुलायम सिंह के साथ आंबेडकर के सिद्धांतों को भी अपनाने की तैयारी में पार्टी का एक सत्र संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और उनके बदलते स्वरूप पर भी रखा गया है. सपा की इस रणनीति के पीछे पार्टी की नई सोशल इंजीनियरिंग छिपी है, जिसे लेकर अखिलेश यादव संजीदगी के साथ काम करने में जुट गए हैं. सूबे में यादव-मुसलमान-दलित और किसान को साधने की कवायद के साथ ही नए सियासी समीकरण को बनाने की कोशिश होगी.
दलित, जाट और किसानों के वोटों पर अखिलेश की निगाहें

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