
लोकसभा नतीजों के बाद हरियाणा में कांग्रेस के पास बड़ा मौका, लेकिन इन खामियों को करना होगा दूर
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राज्य में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है. 2014 के विधानसभा चुनाव में 25 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी ने 2019 में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर 31 कर ली थी. पार्टी का वोट शेयर 20.58 प्रतिशत से बढ़कर 28.08 प्रतिशत हो गया था.
हरियाणा में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की 10 लोकसभा सीटों में से 5 पर कब्जा जमाया था. 2019 के आम चुनाव से उनका वोट प्रतिशत 28.42% से बढ़कर 43.67% पर पहुंच गया है. इस शानदार प्रदर्शन के बाद कांग्रेस आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए काफी उत्साहित नजर आ रही है. पार्टी के दिग्गज नेताओं को लग रहा है कि वो विधानसभा चुनाव में कमाल कर सकते हैं.लेकिन सबसे बड़ी चुनौती कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना है.
हरियाणा में लगातार सुधर रहा कांग्रेस का ग्राफ
राज्य में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है. 2014 के विधानसभा चुनाव में 25 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी ने 2019 में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर 31 कर ली थी. पार्टी का वोट शेयर 20.58 प्रतिशत से बढ़कर 28.08 प्रतिशत हो गया था. इसी तरह लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के वोट शेयर में उछाल आया.भले ही राज्य में पार्टी का प्रदर्शन लगातार सुधर रहा हो लेकिन हरियाणा में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन का अभाव है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में जून में हुई बैठक में पार्टी आलाकमान के सामने यह मुद्दा भी उठाया था.
गुटबाजी के कारण कमजोर है संगठन
राज्य कांग्रेस की इकाई के भीतर गुटीय झगड़े के मसले उठते रहे हैं. पार्टी आलाकमान ने राज्य इकाई में बढ़ती गुटबाजी को गंभीरता से लिया था. सूत्रों का कहना है कि AICC प्रभारी दीपक बाबरिया को अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है. इस बैठक में भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, उदय भान और प्रदेश मामलों के प्रभारी दीपक बाबरिया मौजूद थे.
यह गुटबाजी तब खुलकर सामने आई थी जब कुमारी सैलजा ने हाल ही में एक साक्षात्कार में हुड्डा और बाबरिया पर निशाना साधते हुए कहा था कि ऐसे कई लोग हैं जो अकेले जाना चाहते हैं. जब कोई यह ठान ले कि वह सहयोग नहीं करेगा तो कुछ नहीं कहा जा सकता.

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