
लॉर्ड्स में भारत के डेब्यू टेस्ट की कहानी... जिसमें अंग्रेजों पर टूट पड़े थे मोहम्मद निसार और अमर सिंह
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भारतीय टीम का लॉर्ड्स मैदान से खास नाता रहा है. इसी मैदान पर भारतीय टीम ने अपने टेस्ट इतिहास का डेब्यू मुकाबला खेला था. वो एतिहासिक मुकाबला साल 1932 में खेला गया था.
भारत और इंग्लैंड के बीच फिलहाल पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है. टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला लीड्स में खेला गया था, जिसमें मेजबान टीम इंग्लैंड को 5 विकेट से जीत हासिल हुई थी. फिर भारतीय टीम ने जबरदस्त कमबैक किया और एजबेस्टन टेस्ट मैच में 336 रनों से बड़ी जीत दर्ज की. अब टेस्ट सीरीज का तीसरा मुकाबला 10 जुलाई (गुरुवार) से लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर शुरू हुआ है.
...जब भारत के डेब्यू टेस्ट में इन दो गेंदबाजों ने किया कमाल
भारतीय टीम का लॉर्ड्स मैदान से खास नाता रहा है. इसी मैदान पर भारतीय टीम ने अपने टेस्ट इतिहास का डेब्यू मुकाबला खेला था. वो एतिहासिक मुकाबला साल 1932 में 25-28 जून तक खेला गया था, जिसमें एक रेस्ट डे भी शामिल था. वो मुकाबला भारत ने सीके नायडू की अगुवाई में तीन दिन में ही गंवा दिया था. हालांकि हार के बावजूद भारतीय तेज गेंदबाजों मोहम्मद निसार और अमर सिंह ने अपनी बेहतरीन गेंदबाजी से महफिल लूटी. निसार की रफ्तार और अमर की स्विंग गेंदबाजी के आगे इंग्लिश बल्लेबाज कांपते नजर आए थे.
मुकाबले में इंग्लिश कप्तान डगलस जार्डिन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था. हालांकि उनका ये फैसला शुरुआत में गलत साबित हुआ. कप्तान जार्डिन ने यदि 79 रन नहीं बनाए होते तो इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 259 के स्कोर तक नहीं पहुंच पाती. मोहम्मद निसार ने सबसे ज्यादा पांच और अमर सिंह ने दो विकेट झटके. ऑफ स्पिनर सीके नायडू ने भी दो विकेट हासिल किए. निसार ने ही भारत की ओर से टेस्ट इतिहास का पहला विकेट लिया. साथ ही पांच विकेट हॉल लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज भी बने.
जवाब में भारत की पहली पारी 189 रनों पर सिमट गई. यानी इंग्लैंड को पहली पारी के आधार पर 70 रनों की लीड मिली. पहली पारी में एक समय भारत का स्कोर दो विकेट के नुकसान पर 110 रन था. इसके बाद बिल बोवेस (4 विकेट) और बिल वोस (3 विकेट) की अगुवाई में इंग्लैंड ने शानदार वापसी की. सीके नायडू ने सबसे ज्यादा 40 रन बनाए थे. वहीं नाओमल जूमाल (33) और वजीर अली (31) ने भी उपयोगी पारियां खेलीं.
फिर इंग्लिश कप्तान डगलस जार्डिन ने दूसरी पारी में शानदार बैटिंग करते हुए 85* रन बनाए, जिसके चलते इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी 8 विकेट पर 275 रन बनाकर घोषित कर दी. भारत की ओर से जहांगीर खान ने 60 रन देकर 4 विकेट झटके. वहीं अमर सिंह को दो, जबकि मोहम्मद निसार को एक सफलता हासिल हुई.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












