
लखनऊ में अस्पताल से लेकर श्मशान स्थल हुए फुल
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य सेवाएं कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते प्रकोप के आगे चरमरा गई हैं. योगी सरकार में कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने 12 अप्रैल को शासन को चिट्टी लिखकर स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोली है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य सेवाएं कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते प्रकोप के आगे चरमरा गई हैं. सोमवार 12 अप्रैल की दोपहर राजधानी के प्रसिद्ध इतिहासकार 82 वर्षीय पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीण का बुखार तेज हो गया. परिजनों ने 108 नंबर पर एंबुलेंस को सूचना दी लेकिन दो घंटे इंतजार के बाद भी यह नहीं पहुंची. सरकारी एंबुलेंस के न आने के बाद घर वाले उन्हें प्राइवेट गाड़ी से बलरामपुर अस्पताल लेकर जा रहे थे. इस बीच रास्ते में ही डॉ. प्रवीण की सांसें थम गईं. अस्पताल में डॉक्टर ने उन्हें मृत लाया घोषित कर दिया. सरकारी तंत्र की उपेक्षा से डॉ. योगेश प्रवीण की मौत के बाद लोगों में नाराजगी है. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता डॉ आशुतोष वर्मा पटेल ने ट्विटर पर लिखा है, “लखनऊ की शान, मशहूर इतिहासकार पद्मश्री योगेश प्रवीण जी हम सबके बीच नहीं रहे. उनका परिवार उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के लिए 2 घंटे तक संघर्ष करता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई,”' डॉ. प्रवीण ने अवध और लखनऊ के इतिहास पर कई किताबें लिखी थीं. इसके लिए कई सम्मान और पुरस्कार भी मिले थे. कहानी, उपन्यास, नाटक, कविता समेत तमाम विधाओं में लिखने वाले डॉ. योगेश प्रवीण विद्यांत हिन्दू डिग्री कॉलेज से बतौर प्रवक्ता वर्ष 2002 में रिटायर हुए थे.More Related News

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