
राम मंदिर को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे का दलित कार्ड क्या कांग्रेस का भी स्टैंड है?
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कांग्रेस ने राम मंदिर उद्घाटन समारोह से ये कहते हुए दूरी बनाई थी कि वो बीजेपी का पॉलिटिकल इवेंट था. अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह रहे हैं कि अगर वो अयोध्या जाते तो बीजेपी के लोग उनको बर्दाश्त नहीं कर पाते, क्योंकि वो दलित समुदाय से आते हैं.
राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस के स्टैंड को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने खारिज किया है - और अयोध्या समारोह के बहाने देश भर में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव को भी राम मंदिर से भी जोड़ दिया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक मजबूरियों की वजह से राम मंदिर उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं हुई. मोदी ने जिन राजनीतिक मजबूरियों की बात की है, वो कांग्रेस पर बीजेपी की तरफ से लगाये जाने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों से जुड़ा हुआ है. मोदी और बाकी बीजेपी नेता कांग्रेस नेताओं पर राम मंदिर निर्माण में बाधा पहुंचाने का भी आरोप लगाते रहे हैं.
भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में दलितों और आदिवासियों के अपपान का आरोप लगाया था. अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन समारोह 22 जनवरी को हुआ था, और उससे पहले ही राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर निकल गये थे.
मणिपुर से मुंबई तक की न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी जब उत्तर प्रदेश पहुंचे तो कहा कि राम मंदिर उद्घाटन समारोह में गौतम अडाणी, मुकेश अंबानी और अमिताभ बच्चन को बुलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने ये संदेश दिया है कि देश की बड़ी आबादी की कोई अहमियत नहीं है.
एक बार फिर कांग्रेस की तरफ से दलितों के मुद्दे पर बीजेपी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है. राहुल गांधी की ही तरह मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दलितों के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाया है, और राम मंदिर उद्घाटन समारोह की भी मिसाल दी है.
मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपमानित करने का भी आरोप लगाया है. कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि दोनों को इसलिए अपमानित किया गया क्योंकि वे आदिवासी और दलित समुदाय से आते हैं. मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह और संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया, और वैसे ही पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी संसद भवन का शिलान्यास नहीं करने दिया गया.

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