
राफेल सौदे की फ्रांस में जांच, नई नेवी डील से पहले भारत से मांगी मदद!
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भारत ने वायुसेना के लिए 36 राफेल जेट खरीदे थे. सभी भारत आ चुके हैं. लेकिन इस सौदे पर हुआ विवाद अब तक खत्म नहीं हुआ है. भारत में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. अब फ्रांस में भी इसकी जांच चल रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को फ्रांस दौरे पर जा रहे हैं. इस मौके पर स्कॉर्पियन सबमरीन्स के साथ-साथ नेवी के लिए 26 राफेल जेट की डील पर भी मुहर लग सकती है. लेकिन इस बीच पुरानी राफेल डील में कथित घोटाले का 'जिन्न' निकलकर बाहर आ सकता है.
दरअसल, भारत ने फ्रांस से पहले 36 राफेल जेट खरीदे थे. एयर फोर्स के लिए खरीदे गए इन जेट्स के सौदे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. भारत में इसपर काफी राजनीति हुई थी. इसकी जांच पैरिस में चल रही है. फ्रांस की न्यूज वेबसाइट मीडियापार्ट का कहना है कि जांच को देख रहे मजिस्ट्रेट ने भारतीय अधिकारियों को एक पत्र भेजा है. इसमें मामले की जांच में सहयोग मांगा गया है.
पीएम मोदी के फ्रांस दौरे से पहले छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस मामले की जो जांच हुई, उससे जुड़ी फाइल्स फ्रांस के मैजिस्ट्रेट स्टडी करना चाहते हैं. बता दें कि Mediapart ने ही घोटाले का आरोप लगाते हुए तब खबर छापी थी. इसमें आरोप लगा था कि डसॉल्ट एविएशन ने गुप्त रूप से लाखों यूरो भारत में मौजूद बिचौलियों को दिए थे.
मीडियापार्ट ने लगाए थे घोटाले के आरोप
Mediapart ने आरोप लगाया था कि फ्रांसीसी विमानन कंपनी डसॉल्ट ने 7.5 मिलियन यूरो भारतीय मिडिलमेन (बिचौलियों) को दिए थे ताकि भारत सरकार राफेल डील को पक्का कर ले. खबर में कहा गया है कि भारतीय जांच एजेंसियों ने राफेल जेट बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट और मिडिलमेन सुशेन गुप्ता के बीच हुए पैसे के लेनदेन के सबूत 2018 में जुटा लिए थे. खबर के मुताबिक, ये कथित सबूत ही मैजिस्ट्रेट देखना चाहते हैं.
हालांकि, डसॉल्ट और भारत सरकार दोनों ने उस सौदे में कुछ भी गलत नहीं पाए जाने की बात कही थी. मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. लेकिन जांच की अर्जियों को कोर्ट ने कुछ भी गलत ना पाते हुए खारिज कर दिया था.

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