
राज ठाकरे ने 20 साल बाद शिवसेना भवन में रखा कदम, बोले- लग रहा जैसे जेल से बाहर आया हूं
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राज ठाकरे 20 वर्षों के बाद शिवसेना भवन पहुंचे. यहां उन्होंने उद्धव ठाकरे और संजय राउत के साथ आगामी बीएमसी चुनाव के लिए मनसे और शिवसेना (यूबीटी) का संयुक्त घोषणापत्र जारी किया.
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने बीएमसी चुनाव के लिए गठबंधन किया है. इस मौके पर दोनों दलों के प्रमुखों ने रविवार को मुंबई के विकास को लेकर कई बड़े वादे किए और संयुक्त घोषणापत्र जारी किया. इस दौरान राज ठाकरे ने 20 साल के लंबे इंतजार के बाद दादर के शिवाजी पार्क स्थित शिवसेना (यूबीटी) मुख्यालय 'शिवसेना भवन' में कदम रखा.
शिवसेना भवन में हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने मौजूदा राजनीतिक हालात, लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया और बीजेपी पर तीखे हमले किए. राज ठाकरे ने कहा, '20 साल बाद यहां आकर ऐसा लग रहा है जैसे मैं जेल से बाहर आया हूं, क्योंकि हर कोई मुझसे यही पूछ रहा है कि 20 साल बाद यहां आकर कैसा लग रहा है. शिवसेना भवन से मेरी बहुत पुरानी और गहरी यादें जुड़ी हैं. उन्हें बताने में कई दिन लग जाएंगे. 1977 में जब शिवसेना भवन बना था, तब जनता पार्टी ने यहां जुलूस निकालकर पत्थरबाजी की थी, जिसका हमारे शिवसैनिकों ने ऊपर से ट्यूबलाइट फेंककर मुंहतोड़ जवाब दिया था.'
मुझे खुशी है कि हम एक साथ आए: उद्धव
उद्धव ठाकरे ने कहा, 'मुझे खुशी है कि हम एक साथ आए हैं और पूरे महाराष्ट्र को हमें साथ देखकर खुशी हो रही है. हमने अपना वचननामा जनता के चरणों में समर्पित किया है.' इस दौरान बीजेपी पर निशाना साधते हुए उद्धव ने कहा, 'अब लोकतंत्र नाम की चीज नहीं बची है. पहले वोट चोरी हुई, अब उम्मीदवार चोरी किए जा रहे हैं. सत्ताधारी दल के उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताने की राक्षसी होड़ लगी हुई है.'
पक्षप्रमुख मा. श्री. उद्धवसाहेब ठाकरे आणि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेनेचे अध्यक्ष श्री. राज ठाकरे ह्यांनी शिवशक्तीचा वचननामा शिवसेना भवनमधील भवानीमातेसमोर ठेवून दर्शन घेतले. pic.twitter.com/j6q8i9tyEL
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, 'स्पीकर को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल विधानसभा के अंदर करना चाहिए, सड़कों पर नहीं. विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव बनाने के लिए शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप में उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. जहां-जहां सत्ताधारी उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, वहां दोबारा चुनाव कराए जाएं और संबंधित रिटर्निंग ऑफिसरों के कॉल रिकॉर्ड की जांच हो.'

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