
राज्य इकाइयों का क्लेश मिटाने के लिए 'राजभवन फॉर्मूले' पर बीजेपी, पहले कटारिया, अब रघुवर दास...
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बीजेपी राज्य इकाइयों का क्लेश मिटाने के लिए अब राजभवन फॉर्मूले पर है. पहले गुलाबचंद कटारिया को राज्यपाल बनाकर राजस्थान का क्लेश दूर करने की कोशिश की गई, अब रघुवर दास को ओडिशा का राज्यपाल बना दिया गया है. इस फैसले के पीछे क्या है?
राष्ट्रपति ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास और तेलंगाना के वरिष्ठ नेता इंद्रसेना रेड्डी नल्लू को राज्यपाल नियुक्त किया है. रघुवर को ओडिशा और नल्लू को त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया है. दोनों नेताओं की नियुक्ति का आदेश भी जारी हो चुका है. अब सियासी गलियारों में इस फैसले के पीछे की वजह को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
कोई इसे नेताओं की पदोन्नति बता रहा है तो कोई मुख्यधारा की राजनीति से किनारे किया जाना. चर्चा ये भी है कि बीजेपी ने राज्य इकाइयों का क्लेश मिटाने के लिए नया फॉर्मूला निकाला है- नेताओं को राज्यपाल बनाकर संबंधित राज्य से दूर कहीं राजभवन की चहारदीवारी में सीमित कर देने, संवैधानिक पद के दायरे में सीमित कर देने की रणनीति. रघुवर और नल्लू को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है.
दरअसल, नल्लू जिस तेलंगाना से आते हैं, वहां चुनाव का मौसम है. 30 नवंबर को मतदान होना है और नतीजे 3 दिसंबर को आएंगे. बीजेपी ने अभी कुछ महीने पहले ही वहां प्रदेश संगठन की कमान बंदी संजय को सौंपी है. इंद्रसेना रेड्डी नल्लू अविभाजित आंध्र प्रदेश की विधानसभा में बीजेपी के टिकट पर तीन बार विधायक रहे हैं, प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही विधानसभा में विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. इंद्रसेना अब करीब 73 साल के हो चुके हैं और बीजेपी में 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को टिकट देने की नीति के लिहाज से भी उनकी टिकट दावेदारी कमजोर मानी जा रही थी.
हालांकि, कहा ये भी जा रहा था कि पार्टी जिस राज्य में अपनी सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है. वहां इंद्रसेना जैसे अनुभवी और पुराने सिपहसालार की अनदेखी का खतरा मोल नहीं लेना चाहेगी. इंद्रसेना उम्र की बाधा के बावजूद बीजेपी के चुनाव अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण किरदार माने जा रहे थे. टिकट बंटवारे से पहले ही इंद्रसेना को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले से साफ हो गया है कि बीजेपी तेलंगाना में नए नेतृत्व के साथ ही आगे जाएगी.
रघुबर की नियुक्ति मरांडी के नेतृत्व पर मुहर?
झारखंड के पहले गैर आदिवासी मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज्यपाल बनाए जाने को दो नजरिए से देखा जा रहा है. एक झारखंड बीजेपी में मरांडी युग रिटर्न पर मुहर और दूसरा ओडिशा में तेजी से पैर पसारती पार्टी की ओर से नवीन पटनायक सरकार पर नकेल. राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि आजकल राजभवन और मुख्यमंत्री कार्यालय में तकरार आम बात हो गई है. पश्चिम बंगाल से लेकर केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली तक इसी तरह के उदाहरण देखने को मिलते हैं.

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