
योगी, ममता, केजरीवाल, शिंदे, हेमंत... किस फैक्टर की वजह से घट-बढ़ रहा है किस CM का ग्राफ
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मूड ऑफ द नेशन सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता घटी है. सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2023 में योगी आदित्यनाथ के कामकाज से 47% लोग संतुष्ट थे. फरवरी 2024 में यह आंकड़ा बढ़ा और 51% हो गया. अब 6 महीने में अचानक लोकप्रियता घटकर 39% फीसदी हो गई है.
लोकसभा चुनाव हो गए हैं. अब हरियाणा, जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव की बारी है. इसी साल महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में भी चुनाव होने हैं. इस बीच, आजतक ने देश की जनता का मूड भांपने के लिए सी-वोटर के साथ मिलकर 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे किया है. 1 लाख 36 हजार 463 सैंपल साइज लिए हैं और लोगों से विभिन्न मुद्दों समेत नेताओं की लोकप्रियता के बारे में उनकी राय जानी है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के बारे में लोगों के बीच अलग-अलग राय है. आइए जानते हैं कि किस सीएम का ग्राफ, किस फैक्टर की वजह से घट-बढ़ रहा है?
यूपी के सीएम के बारे में लोगों की क्या राय?
मूड ऑफ द नेशन सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता घटी है. सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2023 में योगी आदित्यनाथ के कामकाज से 47% लोग संतुष्ट थे. फरवरी 2024 में यह आंकड़ा बढ़ा और 51% हो गया. अब 6 महीने में अचानक लोकप्रियता घटकर 39% फीसदी हो गई है. जबकि बेहतर मुख्यमंत्री के मामले में उन्होंने इस सर्वे में शीर्ष स्थान हासिल किया है. आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2024 में 33.2% लोगों ने उन्हें सबसे अच्छा मुख्यमंत्री माना. हालांकि, इसी साल फरवरी 2024 में उनका समर्थन 46.3% था. अगस्त 2023 में हुए सर्वे में योगी को 43% लोगों ने सबसे बेहतर मुख्यमंत्री माना था.
योगी आदित्यनाथ का ग्राफ क्यों घट और बढ़ रहा है?
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त और स्पष्टवादी छवि ने उन्हें लोकप्रिय नेता बनाया है. उनके समर्थक उन्हें एक दृढ़ नेता मानते हैं जो राज्य के विकास और सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं. मजबूत और सख्त प्रशासक की छवि उन्हें अलग बनाती है. उन्होंने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कठोर कदम उठाए हैं. अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अवैध संपत्तियों पर बुल्डोजर एक्शन से चर्चा में आए हैं. हालांकि, योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और विचारधारा को लेकर आलोचनाएं भी होती रही हैं, खासकर उनके विरोधी घेरने का कोई मौका नही छोड़ते हैं. हालांकि, यूपी में पेपर लीक एक बड़ा मुद्दा बन गया है. फरवरी में पुलिस भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने के आरोप लगे और री-एग्जाम की मांग उठी तो सरकार ने इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है. इस मुद्दे पर युवाओं में नाराजगी देखने को मिली है. हालांकि, 6 महीने बाद ही सरकार फिर से एग्जाम करवा रही है. हफ्तेभर पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा का परिणाम नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया है. यह नाराजगी भी सड़कों पर देखने को मिल रही है. रोजगार को लेकर युवा वर्ग संतुष्ट नहीं हैं. यही मुद्दा सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को खासा प्रभावित कर रहा है.

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