
'ये बेहद चिंताजनक', इजरायल-हमास युद्ध में नागरिकों की मौत पर संयुक्त राष्ट्र में बोला भारत
AajTak
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के प्रतिनिधि आर. रवींद्र ने बुधवार को कहा कि भारत, इजरायल-हमास के बीच चल रहे युद्ध में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और बड़े पैमाने पर नागरिक जीवन के नुकसान को लेकर बेहद चिंतित है.
इजरायल और हमास के बीच युद्ध को करीब 20 दिन बीत गए हैं, लेकिन अभी दोनों पक्षों की ओर से सीजफायर की कोई गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने कहा कि वो इजरायल-हमास युद्ध में नागरिक जीवन के नुकसान को लेकर बेहद चिंतित है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के डिप्टी परमानेंट एंबेसडर आर. रवींद्र ने बुधवार को कहा, "भारत इजरायल-हमास के बीच चल रहे युद्ध में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और बड़े पैमाने पर नागरिक जीवन के नुकसान को लेकर काफी चिंतित है."
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 'फिलिस्तीनी प्रश्न समेत मिडिल-ईस्ट की स्थिति' पर बहस के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रवींद्र ने ये बयान दिया है.
उन्होंने कहा, "इजरायल में 7 अक्टूबर को हुए आतंकवादी हमले चौंकाने वाले थे और हम स्पष्ट रूप से उनकी निंदा करते हैं. हमारे प्रधानमंत्री पहले वैश्विक नेताओं में से एक थे जिन्होंने जानमाल के नुकसान पर अपनी संवेदना व्यक्त की और निर्दोष पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए प्रार्थना की."
युद्ध में नागरिकों की हालत गंभीर और चिंता का विषय: भारत
उन्होंने कहा, "हम संकट की घड़ी में इजराइल के साथ एकजुटता से खड़े थे जब वे इन आतंकवादी हमलों का सामना कर रहे थे. पीड़ितों के परिवारों के प्रति हमारी संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना. इस संघर्ष में नागरिक हताहतों का मामला गंभीर और निरंतर चिंता का विषय है." भारत की ओर से कहा गया कि सभी पक्षों को नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की रक्षा करनी चाहिए.

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.









