
'...ये टीम इंडिया खेलेगी', पहली बार देखते ही कोच ने की भविष्यवाणी, 154 रन ठोकने वाली प्रतिका रावल की कहानी
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Pratika Rawal Story: प्रतिका रावल टीम इंडिया की वो खिलाड़ी जिसने आयरलैंड के खिलाफ हालिया वनडे सीरीज में अपने बल्ले से तबाही मचा दी. अपना पहला शतक जड़ा, उनकी क्रिकेट के मैदान में आने की कहानी बेहद जबरदस्त है. प्रतिका के शुरुआती कोच लुईस डिसूजा (बाबा) और पिता प्रदीप रावल ने उनकी कहानी बयां की. प्रतिका के पिता अंपायर हैं.
Pratika Rawal, Team India Cricketer Story: '...मैंने जब उसे पहली बार बल्ले की ग्रिप करते हुए दिखा, तभी यह बता दिया कि यह टीम इंडिया खेलेगी... बोल दिया था ये टीम इंडिया का फ्यूचर है. उसने आईपीएल लेवल के कई पुरुष क्रिकेटरों की नेट्स में धुनाई की है, वो खुद ही कहती थी कि मैं प्रैक्टिस करने आऊंगी... सर! थोड़े तगड़े गेंदबाज बुलाइगा'...
ये अल्फाज भारतीय क्रिकेट टीम की नई स्टार ओपनर प्रतिका रावल के शुरुआती कोच रहे लुईस डिसूजा (बाबा) के हैं. प्रतिका प्रतिका ने 15 जनवरी को राजकोट में हुए तीसरे वनडे मुकाबले में 129 गेंदों में 154 रनों की पारी खेली. उनकी पारी में 20 चौके और 1 छक्का शामिल रहे. लुईस के सानिध्य में प्रतिका ने क्रिकेट की शुरुआती बारीकियां सीखीं, वहीं पिता प्रदीप रावल ने 3 साल की उम्र में सबसे पहले प्रतिका को बल्ला थमाया था.
लुईस ने प्रतिका के अपनी एकेडमी में आने के पहले दिन दिन को याद करते हुए कहा- पहले दिन वह चश्चमा पहनकर नेट्स करने आई थी, उसने क्रिकेट की प्रैक्टिस में लड़कों को भी खूब पिटाई की है.
लुईस ने पिछले साल को यादकर कहा- प्रतिका पिछले साल जब नेट्स प्रैक्टिस करने आई थी, तो उसने आईपीएल लेवल, यूनिवर्सिटी लेवल के पुरुष गेंदबाजों को डटकर सामना किया.
प्रतिका के पिता प्रदीप रावल अपने जमाने के शानदार क्रिकेटर रहे हैं, कभी उनकी क्लब लेवल पर तूती बोलती थी. प्रदीप शानदार फास्ट बॉलर और हार्ड हिटर बल्लेबाज रहे हैं. प्रदीप अभी दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के BCCI-प्रमाणित लेवल-II अंपायर हैं. 10 साल की उम्र में प्रदीप रावल सबसे पहली बार लुईस डिसूजा के पास लेकर रामजस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स लेकर गए थे.
बेटा हो बेटी क्रिकेटर ही बनाना था, बोले प्रतिका के पिता पटेल नगर जिमखाना में लुईस और प्रदीप रावल क्रिकेट कोचिंग देते थे. प्रदीप ने बताया- मैं यूनिवर्सिटी (दिल्ली यूनिवर्सिटी) लेवल पर खेला, लेकिन आगे बढ़ने के लिए पैरेंटस का सपोर्ट नहीं मिल पाया. ऐसे में मैंने शुरुआत में ही सोच लिया कि जब भी शादी के बाद बेटा या बेटी होगी तो उसको क्रिकेटर बनाना है, आज देखिए, बेटी ने नाम रोशन कर दिया.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












