
यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात से केरल तक... 5 पालाबदल, जो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दे सकते हैं बड़ा घाव
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चुनावी साल में यूपी से लेकर केरल तक नेताओं के एक से दूसरे दल में जाने का सिलसिला तेज हो गया है. चुनावी साल में हुए पांच पालाबदल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा घाव दे सकते हैं.
लोकसभा चुनाव से पहले नेताओं के दल-बदल का सिलसिला तेज हो गया है. यूपी से बिहार, महाराष्ट्र से गुजरात तक एक के बाद एक नेता अपनी पुरानी पार्टी छोड़ नए ठिकाने तलाश रहे हैं. सबसे अधिक झटके कांग्रेस को लग रहे हैं. राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत के समय ही महाराष्ट्र में मिलिंद देवड़ा के इस्तीफे से नेताओं के कांग्रेस छोड़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह गुजरात से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक जारी है. अरुणाचल में चार विधायकों वाली पार्टी की स्ट्रेंथ तीन विधायकों के पार्टी छोड़ने से एक पर आ गई है तो वहीं गुजरात में भी एक के बाद एक बड़े नेता पार्टी छोड़ते जा रहे हैं. चुनावी साल में पांच ऐसे पालाबदल हुए हैं जो कांग्रेस को बड़ा घाव दे सकते हैं.
अशोक चव्हाण
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम अशोक चव्हाण मराठवाड़ा रीजन की नांदेड़ सीट से सांसद भी रहे हैं. 2014 के आम चुनाव में अशोक ने मोदी लहर के बावजूद नांदेड़ की सीट कांग्रेस की झोली में डाल दी थी. हालांकि, 2019 के चुनाव में वह बीजेपी उम्मीदवार से हार गए थे. तब वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) के उम्मीदवार को एक लाख 66 हजार से अधिक वोट मिले थे. वीबीए इस बार कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के साथ विपक्षी गठबंधन में शामिल है. अशोक चव्हाण को बीजेपी ने राज्यसभा भेज दिया है.
बीजेपी अशोक के आने के बाद नांदेड़ में चुनावी राह आसान होने, मराठवाड़ रीजन में क्लीन स्वीप के दावे कर रही है. चव्हाण के पिता शंकरराव चव्हाण भी सूबे के सीएम रहे हैं और मराठवाड़ा रीजन में चव्हाण फैमिली का अच्छा प्रभाव माना जाता है. अशोक के पार्टी छोड़ने के बाद नेतृत्व के मोर्चे पर कांग्रेस के पास इस रीजन में प्रभावशाली चेहरे का अभाव उत्पन्न हो गया है. महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं. कांग्रेस 2014 में दो सीटें जीतने में सफल रही थी जिसमें एक सीट नांदेड़ भी थी जहां से खुद अशोक चव्हाण जीते थे.
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अर्जुन मोढवाडिया

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