
'यह समय छात्र राजनीति छोड़ने का है', जब सुशील मोदी से शादी में बोले थे वाजपेयी
AajTak
बिहार बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा रहे सुशील मोदी का निधन हो गया है. छात्र राजनीति से सियासी सफर का आगाज करने वाले सुशील मोदी के चुनावी राजनीति में आने का किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ा है.
बिहार की सियासत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का सबसे बड़ा चेहरा रहे सुशील मोदी का निधन हो गया है. 72 साल के सुशील मोदी कैंसर से पीड़ित थे और उनका उपचार एम्स में चल रहा था. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार की एनडीए सरकार में डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी लंबे समय तक सूबे के वित्त मंत्री भी रहे. सुशील मोदी का अंतिम संस्कार मंगलवार की शाम बिहार की राजधानी पटना के गंगा घाट पर होना है. सुशील मोदी के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के सीएम नीतीश कुमार, आरजेडी प्रमुख लालू यादव समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है.
बिहार के एक वैश्य परिवार में जन्मे सुशील मोदी पटना विश्वविद्यालय से B.Sc. की पढ़ाई करते समय ही छात्र राजनीति में एक्टिव हो गए थे. उन्होंने 1974 में जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में हुए बिहार आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसी दौरान वह नीतीश कुमार और लालू यादव के संपर्क में आए. बहुत ही कम समय में सुशील मोदी की गिनती बिहार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रमुख नेताओं में होने लगी. सुशील मोदी छात्र राजनीति से सियासत में आए थे और इसके लिए वह पूर्व प्रधानमंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी को क्रेडिट देते थे.
सुशील मोदी की कैसे हुई थी सियासत में एंट्री
सुशील मोदी ने एक बार सियासत में अपनी एंट्री का किस्सा साझा करते हुए कहा था कि 1986 में मेरी शादी थी. शादी के समय तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि अब छात्र राजनीति छोड़ने और पूर्णकालिक पॉलिटिकल एक्टिविस्ट बनने का समय आ गया है. सुशील मोदी की शादी से जुड़े इस वाकये के करीब चार साल बाद पटना सेंट्रल विधानसभा सीट से बीजेपी ने उन्हें टिकट दे दिया. पटना सेंट्रल विधानसभा सीट अब अस्तित्व में नहीं है.
यह भी पढ़ें: BJP के कद्दावर नेता, पूर्व डिप्टी सीएम और सांसद, ऐसा रहा सुशील मोदी का सियासी सफर
पटना के पुराने निवासी सुशील मोदी को स्कूटर पर चलने वाले एक विनम्र राजनेता के रूप में याद करते हैं. वह भ्रष्टाचार को लेकर मुखर रहे. चारा घोटाले को लेकर दायर जिस याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे, उसके याचिकाकर्ताओं में सुशील मोदी भी थे. इस मामले में चार्जशीट दायर होने के बाद लालू यादव को 1997 में सीएम का पद छोड़ना पड़ा था. सुशील मोदी बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. सुशील मोदी ने 2004 में भागलपुर सीट से सांसद निर्वाचित होने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.

मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका ने USS Abraham Lincoln कैरियर ग्रुप अरब सागर में तैनात कर ईरान पर हमले की धमकी दी है. ईरान डर से अपने न्यूक्लियर साइट्सको गहराई में छिपा रहा है. टनल सील कर रहा है. ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी को बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है. IRGC 1-2 फरवरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज करेगा.

दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो काजल की हत्या के मामले अब नई परतें खुल रही हैं. उसके परिजनों ने पति अंकुर पर हत्या के साथ-साथ पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड होने के गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा है कि काजल के पास उसके काले कारनामों के राज़ थे. हत्या से पहले वीडियो कॉल और डंबल से हत्या के आरोपों ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में चल रही नकली ब्रांडेड जूतों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का खुलासा किया है. यहां नाइकी, एडिडास, न्यू बैलेंस और स्केचर्स के नकली जूते बनाए जा रहे थे. पुलिस ने यूनिट के मालिक संदीप सिंह को गिरफ्तार कर भारी मशीनें और हजारों नकली जूतों के पार्ट्स बरामद किए हैं.

राजस्थान में साध्वी प्रेम बासा की संदिग्ध मौत. साध्वी प्रेम बासा, जो एक प्रसिद्ध कथा वाचक थीं, का अस्पताल में अचानक निधन हुआ. उनके निधन पर कई सवाल उठे हैं. पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. परिवार और आश्रम वालों के बीच विवाद भी देखने को मिला है. एक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने मामले को और पेचीदा बना दिया है.

हरियाणा के दादरी जिले में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बीजेपी विधायक को चमचों से दूर रहने की कड़वी नसीहत एक बुजुर्ग ने दी है. यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. वीडियो में बुजुर्ग की बातों का अंदाज़ साफ दिखता है जो नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाता है. यह घटना लोकतंत्र के अंतर्गत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद की महत्ता को दर्शाती है. ऐसे संवाद समाज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने में मदद करते हैं.








