
यह महिला नहीं होती तो शायद आज Mercedes का वजूद ही न होता! जानिए बर्था बेंज की अद्भुत कहानी
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Women's Day Special: एक सुबह बर्था बेन्ज (Bertha Benz) उठी और उन्होनें वो फैसला लिया, जिसके बूते आज दुनिया की प्रमुख लग्ज़री कार निर्माता कंपनी Mercedes Benz खड़ी है. मर्सिडीज का वो थ्री-प्वाइंटेड स्टार उनके दम पर ही चमक रहा है जिसके बिना शायद... कंपनी कभी अस्तित्व में आती. पढ़िये बर्था बेन्ज की अद्भुत कहानी-
एक बहुत ही पुरानी कहावत है कि, "हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है." हो सकता है कि, ये कहावत सभी के लिए न हो लेकिन दुनिया की सबसे लग्ज़री कार कंपनियों में से एक मर्सिडीज़ बेन्ज़ के बुलंदियों के पीछे तो कम से कम एक महिला का ही हाथ है. मर्सिडीज का वो थ्री-प्वाइंटेड स्टार उस महिला के दम पर चमक रहा है जिसके बिना शायद कंपनी कभी अस्तित्व में ही नहीं आती. हम बात कर रहे हैं बर्था बेंज (Bertha Benz) की, इनके लिए ये कहना भी गलत नहीं होगा कि, बर्था बेन्ज ने ही दुनिया को पहली बार कारों से परिचित कराया था. तो आज महिला दिवस (Women's Day) के ख़ास मौके पर आइये जानें बर्था की अद्धभुत कहानी के बारे में-
कार्ल फ्रेडरिक बेन्ज़ (Carl Benz) ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में अपने विशेष योगदान के लिए जाने जाते हैं. जर्मनी में जन्मे कार्ल बेंज पेशे से एक ऑटोमोटिव इंजीनियर और इंजन डिजाइनर थे. साल 1885 में उन्होनें अपनी पहली कार के तौर पर बेन्ज पेटेंट मोटर वैगन (Benz Patent-Motorwagen) को तैयार किया था. लेकिन वो इस बात को लेकिर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थे कि, ये कार अभी रोड के लिए तैयार है या नहीं. इस कार को दुनिया की पहली मॉर्डन प्रैक्टिकल कार के तौर पर भी जाना जाता है.
बेन्ज को भले ही अपनी कार को लेकर संशय था, लेकिन एक महिला थी जिसे यह यकीन था कि उनकी कार पूरी तरह से सड़क पर दौड़ने के लिए तैयार है. ये महिला और कोई नहीं बल्कि उनकी पत्नी बर्था बेन्ज थी. कार्ल की सफलता उनकी पत्नी के महत्वपूर्ण सहयोग के बिना संभव नहीं होती, यदि बर्था बेन्ज ने अपने पति को बिना बताए एक महत्वपूर्ण फैसला न लिया होता.
बर्था बेंज: पहली कार चालक
जब कार्ल बेंज ने अपनी पहली कार बनाई तो वह इसे बेचने में सफल नहीं हो सके. कार्ल बेंज और उनकी पत्नी बर्था बेंज इस बात से निराश थे कि उनकी कार जो उस वक्त तकरीबन 3 साल से बाजार में थी, बिक ही नहीं रही थी. बर्था बेंज का मानना था कि कार नहीं बिकने का कारण यह था कि वास्तव में किसी ने किसी को इसका इस्तेमाल करते नहीं देखा था. इसलिए उसने इसे स्वयं चलाने का निर्णय लिया.
साल 1888 में एक सुबह बर्था उठी और बिना कार्ल बेन्ज को जानकारी दिए उन्होनें उस कार को गैराज से बाहर निकाला. बर्था ने अपने दोनों बेटों यूजेन और रिचर्ड को साथ लिया और फिर एक ऐतिहासिक यात्रा पर निकल गई. सड़क पर तीन पहियों वाली इस मशीन को देखकर किसी भी राहगीर को विश्वास नहीं हो रहा था कि ये एक कार (CAR) है, और उनकी हैरानी तब और बढ़ जाती जब उनकी नजर बर्था पर पड़ती. क्योंकि लोगों को यकीन नहीं हो पा रहा था कि सड़क पर दौड़ती इस गाड़ी के स्टीयरिंग व्हील का कंट्रोल एक महिला के हाथों में था.

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