
मिजोरम के जय-वीरू: जेल ब्रेक कर भागा, विजिटर बन साथी से मिलने दूसरे जेल पहुंचा, फिर...
AajTak
साउथ मिजोरम की सियाहा जिला जेल में बंद 24 वर्षीय कैदी वनरामपना जेल से भाग गया. उसके बाद वह अपने साथी से मिलने दूसरी जेल यानी आइजोल सेंट्रल जेल पहुंच गया. जेल से कैदी के भागने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया.
मिजोरम में शोले मूवी की जय-वीरू की जोड़ी सामने आई है. सियाहा जिला जेल में बंद एक कैदी जेल से भागने में कामयाब रहा, लेकिन वो अपने साथी से मिलने के लिए आइजोल सेंट्रल जेल में दोबारा आया. इस दौरान वह पकड़ा गया, लेकिन पुलिस को चकमा देकर वह फिर फरार हो गया.
साउथ मिजोरम की सियाहा जिला जेल में बंद 24 वर्षीय कैदी वनरामपना जेल से भाग गया. उसके बाद वह अपने साथी से मिलने दूसरी जेल यानी आइजोल सेंट्रल जेल पहुंच गया. जेल से कैदी के भागने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया. इस घटना ने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जनता को भी हैरान कर दिया.
टीओआई के मुताबिक, वनरामपना चोरी करने के आरोप में सियाहा जेल में बंद था. अधिकारियों ने बताया कि वह विचाराधीन कैदी के रूप में न्यायिक हिरासत में था. वो 9 सितंबर को सियाहा जेल के अधिकारियों को चकमा देने में कामयाब रहा. पुलिस के लगातार पीछा करने के बावजूद वह आइजोल सेंट्रल जेल में फिर से आया और अपने 'वीरू' से मुलाकात की.
उसके संदिग्ध व्यवहार को देखते हुए सतर्क जेल प्रहरियों ने पकड़ लिया और आगे की जांच के लिए जेलर को सौंप दिया. सियाहा जेल अधिकारियों से इस बात की पुष्टि हुई कि वनरामपना वास्तव में वही कैदी था, जो महीने की शुरुआत में भाग गया था.
उसे पश्चिमी आइजोल के जोनुआम पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया और भगोड़े को सियाहा जिला जेल में वापस लाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. हालांकि शुक्रवार की रात वनरामपना एक बार फिर पुलिस की हिरासत से भागने में कामयाब रहा.
रविवार तक वनरामपना पुलिस की पकड़ से दूर है. पुलिस कस्टडी से ऐसे कैदी का भागनना सुरक्षा तंत्र के बारे में गंभीर सवाल उठाता है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि अगर जांच में किसी तरह की लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?

जब UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्र सड़कों पर विरोध कर रहे थे और ये कह रहे थे कि उन्हें ज़बरदस्ती अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, तब सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिससे छात्रों को राहत मिली है. यह कदम छात्रों के अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय और हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है.







