
माली में भारतीय अगवा, फिर चर्चा में अलकायदा, सारे बड़े लीडर्स के खात्मे के बाद भी कैसे जिंदा है ये आतंकी संगठन?
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एक वक्त पर आतंक से अमेरिका तक को दहला चुके अलकायदा की कमर तोड़ने के लिए पश्चिम ने भारी एक्शन लिया. लगभग 20 सालों तक कार्रवाई चलती रही. आखिरकार यूएस ने एलान किया कि संगठन खत्म हो चुका. लेकिन खरपतवार की तरह ही ये खत्म होकर फिर-फिर उग आता है. हाल में अलकायदा के आतंकियों ने माली से तीन भारतीयों को अगवा कर लिया.
इस्लामिक देशों में फैले आतंकी संगठनों की बात करें तो अलकायदा के बगैर ये लिस्ट पूरी नहीं हो सकती. नब्बे की शुरुआत में अफगानिस्तान से शुरू हुआ ये गुट ओसामा बिन लादेन के साथ ही अपने चरम पर पहुंच गया. 9/11 अटैक के बाद अमेरिका ने अपने साथी देशों के साथ मिलकर इसे खत्म करने की ठानी. हालांकि दो दशक की कोशिश के बाद भी संगठन पूरी तरह से मिटा नहीं, बल्कि हेडक्वार्टर बदल लिया. अब अफ्रीकन देश माली में इसी संगठन ने तीन भारतीयों को अगवा कर लिया है.
यहां कई बातों पर बात हो सकती है - वेस्ट की कोशिशों के बाद भी कहां कमी रह गई, जो कमजोर होकर भी फिर लौट आता है ये आतंकी संगठन. - क्या है इसका ऑपरेटिंग मॉडल और कौन कर रहा है फंडिंग. - एशिया से हटकर अफ्रीका की तरफ क्यों और कैसे चला गया. - अलकायदा से लेकर इस्लामिक स्टेट तक सारे इस्लामिक संगठन क्या एक विचारधारा रखते हैं, या एक-दूसरे को नुकसान पहुंचा रहे.
सोवियत के खिलाफ हुआ था जन्म, फिर यूएस बना दुश्मन
अलकायदा की शुरुआत सत्तर से अस्सी के दशक के बीच हुई. तब सोवियत संघ (अब रूस) ने अफगानिस्तान में जंग छेड़ी हुई थी. इधर वेस्ट हमेशा की तरह घबराया और रूस की काट के लिए जेहाद के नाम पर अफगानिस्तान में लड़ने के लिए मुस्लिम युवाओं को समर्थन देना शुरू कर दिया. अमेरिका से लेकर सऊदी ने भी लड़ाकों को हथियार और ट्रेनिंग दी. इसी दौरान ओसामा बिन लादेन सऊदी से पाकिस्तान पहुंचा. उसने न केवल इसमें फंडिंग की, बल्कि खुद भी सक्रिय लड़ाई में आ गया. ओसामा ने ही साल 1988 में एक नेटवर्क खड़ा किया, जिसे नाम दिया अलकायदा यानी नींव या फाउंडेशन.
क्या था मकसद अपील की गई कि दुनियाभर के मुस्लिम एकजुट होकर ग्लोबल स्तर पर जेहाद छेड़ें. लादेन का मानना था कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस्लाम के दुश्मन हैं और उनका कमजोर पड़ना या खत्म होना जरूरी है.

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