
मामला दबाने, सबूत मिटाने और जांच टरकाने... वो 7 सवाल जिनके जवाब ममता से चाहते हैं लेडी डॉक्टर के पेरेंट्स
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कोलकाता कांड में ट्रेनी महिला डॉक्टर के माता-पिता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार का कहना है कि पुलिस ने शुरू से ही मामले को दबाने की कोशिश की. पहले हमें बॉडी नहीं देखने दी. फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने में थाने में इंतजार करना पड़ा. जब शव सौंपा गया तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हमें मुंह बंद करने के लिए पैसे ऑफर किए. नए आरोपों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पुलिस की भूमिका अब और संदिग्ध हो गई है.
पश्चिम बंगाल में कोलकाता कांड चर्चा में है. जिस ट्रेनी लेडी डॉक्टर का 'रेप और मर्डर हुआ, उसके पिता ने गुरुवार को सनसनीखेज आरोप लगाकर एक बार फिर पुलिस को सवालों में खड़ा कर दिया है. पिता ने आरोप लगाया है कि 9 अगस्त को जब पुलिस ने उनकी बेटी का शव उन्हें सौंपा तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उन्हें पैसे लेने का ऑफर दिया. कोलकाता पुलिस ने इस पूरे मामले को दबाने की पूरी कोशिश की. हालांकि, सत्तारूढ़ TMC ने इन आरोपों को गलत बताया है. नए आरोपों के बाद अस्पताल प्रशासन से लेकर पुलिस तक पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनके जवाब नहीं मिल रहे हैं?
ये पूरी घटना 9 अगस्त को सामने आई थी. 31 साल की ट्रेनी लेडी डॉक्टर का शव आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित सेमिनार हॉल में मिला था. उसके शरीर से कपड़े गायब थे. खून बह रहा था. शरीर में चोटों के निशान थे. पुलिस ने आरोपी संजय रॉय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने सवाल उठाए और मामले को पुलिस से सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान लिया और सरकार से लेकर पुलिस-अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई थी.
पीड़ित परिवार का क्या कहना है?
पीड़िता के पिता का कहना है, कोलकाता पुलिस ने जल्दबाजी में शव का अंतिम संस्कार कराकर मामले को दबाने की कोशिश की. हमें बेटी का शव नहीं देखने दिया और घंटों पुलिस स्टेशन में इंतजार कराया. पोस्टमार्टम के बाद हमें शव सौंपा गया. इसी दरम्यान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (DCP) ने हमें मुंह बंद करने के लिए पैसे ऑफर किए, लेकिन हमने इससे इनकार कर दिया. पुलिस के ऑफर से परिवार हैरान था. चूंकि उस वक्त परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा था, इसलिए जवाब नहीं दे पाए थे. अब उस अफसर का नाम सीबीआई को बता दिया है. परिजन का सवाल था कि पुलिस क्यों पैसे देना चाहती थी? वो किसे बचाना चाहती थी? इसका जवाब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को देना चाहिए.
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परिवार कहता है कि जब तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ, 300-400 पुलिस वालों ने हमें घेर रखा था, लेकिन अंतिम संस्कार हो जाने के बाद वहां एक भी पुलिस वाला नहीं दिखा. परिवार क्या करेगा, कैसे घर जाएगा? पुलिस ने कोई जिम्मेदारी नहीं ली. जब घर में बेटी का शव माता-पिता के सामने पड़ा था और हम आंसू बहा रहे थे, तब पुलिस पैसे का ऑफर दे रही थी, क्या यही पुलिस की मानवता है?

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