
महुआ मोइत्रा और ममता बनर्जी दोनों के लिए अग्नि-परीक्षा से कम नहीं है कृष्णानगर लोकसभा सीट की लड़ाई
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महुआ मोइत्रा को ममता बनर्जी ने फिर से पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर लोकसभा सीट से ही उम्मीदवार बनाया है. संसद से निष्कासित किये जाने के बाद महुआ मोइत्रा जनता की अदालत से इंसाफ चाहती हैं, और ममता बनर्जी भी समर्थन में साथ खड़ी हैं - और यही कारण है कि ये लड़ाई दोनों के लिए बराबर महत्वपूर्ण हो गई है.
महुआ मोइत्रा को पिछले साल 8 दिसंबर को संसद से बाहर कर दिया गया था. कैश फॉर क्वेरी यानी संसद में पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में निष्कासन के खिलाफ महुआ मोइत्रा सुप्रीम कोर्ट पहुंची हैं - और कानूनी लड़ाई जारी है.
देश की सबसे बड़ी अदालत के बाद महुआ मोइत्रा जनता की अदालत में भी गुहार लगाने वाली हैं, और उसी जनता के बीच जाने वाली हैं जिसने उनको अपना प्रतिनिधि चुनकर लोकसभा भेजा था - तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने महुआ मोइत्रा को फिर से कृष्णानगर सीट से ही लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया है.
शुरुआती दौर में तृणमूल कांग्रेस नेताओं को महुआ मोइत्रा से पल्ला झाड़ते देखा गया था. कुछ भी पूछे जाने पर टीएमसी प्रवक्ता यही कहते थे कि महुआ मोइत्रा ही सही जवाब दे पाएंगी, क्योंकि ममता बनर्जी ये फैसला नहीं ले पाई थीं कि राजनीतिक लाइन क्या लेनी है. डेरेक ओ'ब्रायन भी तब यही समझाते रहे कि एथिक्स कमेटी की जांच पूरी होने के बाद ही टीएमसी कोई प्रतिक्रिया दे पाएगी - लेकिन अंत भला तो सब भला, आखिरकार ममता बनर्जी को महुआ मोइत्रा के साथ खड़ा होना ही पड़ा था. अब तो प्रतिष्ठा की बात हो गई है.
महुआ मोइत्रा के खिलाफ बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लड़ाई शुरू की थी, और अंजाम तक शिद्दत से डटे रहे. महुआ मोइत्रा के संसद से निष्कासन का मिशन तो पूरा हो गया, लेकिन अब बीजेपी के लिए नया चैलेंज उनको फिर से संसद पहुंचने से रोकना होगा.
और जैसे ममता बनर्जी ने अपने कट्टर विरोधी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को रोकने के लिए क्रिकेटर युसूफ पठान को तैनात कर दिया है, जाहिर है महुआ मोइत्रा के खिलाफ बीजेपी भी वैसा ही कोई कारगर उपाय खोज रही होगी. पवन सिंह प्रकरण इस सिलसिले में सबसे बड़ा उदाहरण है. शत्रुघ्न सिन्हा को हराने के लिए बीजेपी ने भोजपुरी सिंगर पवन सिंह को खड़ा कर दिया था, लेकिन वो खुद चुनाव लड़ने से मना कर दिये. अब कोई और सामने आएगा. निश्चित रूप से वो भी वैसे ही कद काठी वाला होगा - महुआ मोइत्रा को फिर से शिकस्त देकर बीजेपी नये सिरे से नैतिक जीत को प्रचारित करने के प्रयास में होगी. नतीजे जो भी हों, कोशिशें तो बिलकुल ऐसी ही होंगी.
लेकिन कृष्णानगर लोकसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस को मिलने चुनौती सिर्फ इतन भर ही नहीं है, और लड़ाई सिर्फ महुआ मोइत्रा या ममता बनर्जी के लिए अकेले की नहीं है - बल्कि, दोनों के लिए बराबर महत्वपूर्ण है, जैसे कोई अग्निपरीक्षा हो.

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