
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए शरद पवार का 'मिशन तुतारी', अजित गुट और बीजेपी में सेंधमारी की तैयारी
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अपने मिशन की शुरुआत शरद पवार कोल्हापुर से कर चुके हैं. कोल्हापुर के कागल चुनावक्षेत्र में अजित पवार के मंत्री के खिलाफ अब बीजेपी के बागी नेता समरजितसिंह घाटगे को मैदान में उतारने के लिए शरद पवार तैयार हैं. 3 सितंबर को समरजितसिंह घाटगे अधिकारीक तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) में शामिल होंगे. कोल्हापुर के गैबी चौक में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है.
लोकसभा चुनाव में शरद पवार ने पश्चिमी महाराष्ट्र में महायुती के नेताओं को जिस तरह से अपने पाले में लिया, उसी का रिपीट एपिसोड यानी 'मिशन तुतारी' अब विधानसभा चुनाव के पहले भी देखने को मिल सकता है. तुतारी शरद पवार की एनसीपी का चुनाव सिंबल है.लोकसभा चुनावों में, महा विकास अघाड़ी (MVA) ने महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को चौंकाते हुए 48 में से 30 सीटों पर जीत हासिल की. अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को सिर्फ एक सीट रायगढ़, मिली, जबकि शरद पवार गुट को आठ सीटें मिलीं. शरद पवार ने लोकसभा चुनाव में जिस तरह से पार्टी टूटने के बाद भी बड़ी जीत दर्ज की, उसके बाद अब सबकी नजर आगामी विधानसभा चुनावों पर हैं, जहां वे अजित गुट और बीजेपी के नेताओं को अपने पाले में लाने की तैयारी में हैं.
शरद पवार अपने मिशन की शुरुआत कोल्हापुर से कर चुके हैं. कोल्हापुर के कागल चुनावक्षेत्र में अजित पवार के मंत्री के खिलाफ अब बीजेपी के बागी नेता समरजितसिंह घाटगे को मैदान में उतारने के लिए शरद पवार तैयार हैं. 3 सितंबर को समरजितसिंह घाटगे अधिकारीक तौर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) में शामिल होंगे. कोल्हापुर के गैबी चौक में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है. खुद समरजितसिंह घाटगे ने इसकी पुष्टी भी की है. इतना ही नहीं, अब कोल्हापुर के कागल के बाद सतारा के वाई, सोलापूर के माढा, पुणे के इंदापूर और जुन्नर चुनावक्षेत्र में भी शरद पवार भतीजे अजित पवार और बीजेपी को मात देने के लिए नई रणनीती अपनाते दिखाई दे रहे हैं.
कौन हैं समरजित सिंह घाटगे?
41 वर्ष के समरजित सिंह घाटगे कोल्हापुर के राजर्षी शाहू महाराज के घराने से ताल्लुकात रखते हैं. पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है. युवाओं में उनकी खासी पैठ है. दूसरी ओर सहकारीता क्षेत्र में वह काफी समय से काम कर रहे हैं. छत्रपती शाहू दूध एंड अग्रो प्रोड्यूसर कंपनी के संचालक हैं और पुणे म्हाडा के चेयरमैन भी रह चुके हैं. समरजित घाटगे पश्चिमी महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के सबसे करीबी नेता माने जाते हैं. लेकिन महायुती में कागल चुनावक्षेत्र राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार) के हिस्से आने वाला है. और हसन मुश्रीफ जैसे कद्दावर नेता को अजित पवार नाराज नहीं करेंगे. यह ध्यान में रखते हुए समरजित सिंह घाटगे ने शरद पवार के साथ जाने का फैसला किया है. बीजेपी ने समरजित सिंह को एमएलसी का ऑफर दिया था. लेकीन उन्होंने वह ठुकरा दिया. बीजेपी के सारे नेताओं को उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दी है. उनका मत परिवर्तन करने के लिए बीजेपी सांसद धनंजय महाडीक ने प्रयास जरूर किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
सतारा के वाई चुनावक्षेत्र में मकरंद पाटील को विकल्प मिल गया?
कोल्हापूर के बाद शरद पवार की पार्टी ने सतारा पर फोकस किया है. वहां पर शरद पवार की राजनीति के सख्त विरोधक रहे भूतपूर्व कांग्रेस नेता प्रतापराव भोसले के बेटे मदन भोसले पर दांव लगाने की कोशिश चल रही है. और इसलिए शरद पवार की एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पिछले हफ्ते मदन भोसले से मुलाकात की. वाई चुनावक्षेत्र से मदन भोसले 2004 में विधायक रह चुके हैं. लेकीन बाद में शरद पवार की पार्टी के नेता मकरंद पाटिल ने यहां पर अपना खासा प्रभाव बनाकर उन्हें दूर रखा. लेकिन अब मकरंद पाटिल अजित पवार के साथ हैं, तो शरद पवार की पार्टी अब मदन भोसले को अपने साथ लेने की कोशिश में है. ध्यान देने वाली बात यह है कि मदन भोसले 2019 में ही बीजेपी में शामिल हुए हैं. शुगर मिल्स के लिए मदद मिलने की उनकी अपेक्षा थी, जो पूरी नहीं हुई. अब उनकी बेटी भी वाई चुनावक्षेत्र में काफी सक्रीय दिखती हैं.

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