
'मनोरंजन के लिए नहीं किया चीतों का शिकार', आरोपों पर सामने आया कोरिया का राज परिवार
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शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के कूनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान (KPNP) में आठ चीतों (पांच मादा और तीन नर) को छोड़ा है. इस दिन को ऐतिहासिक बताया जा रहा है. दरअसल, साल 1952 में आधिकारिक तौर पर भारत के जंगल चीता मुक्त हो गए थे. दावा किया जाता है कि आखिरी चीते को छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में वहां के महाराजा ने शिकार के लिए मार डाला था.
पूरे 70 साल बाद एक बार फिर भारत की धरती पर चीतों की वापसी हुई है. छत्तीसगढ़ के जिस शाही परिवार पर आखिरी चीतों का शिकार करने के आरोप लगाए जाते हैं, उसने इन दावों को सिरे से खारिज किया है. इसके साथ ही ये भी कहा है कि भारत में 1947 के बाद भी चीते देखे गए. उन्होंने ये भी कहा कि शाही परिवार लोगों की सुरक्षा करता था. कोई शिकार मनोरंजन के लिए नहीं करते थे. सिर्फ आदमखोर वन्य जीवों से बचाने के लिए शिकार करना पड़ता था.
बता दें कि शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के कूनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान (KPNP) में आठ चीतों (पांच मादा और तीन नर) को छोड़ा है. इस दिन को ऐतिहासिक बताया जा रहा है. दरअसल, साल 1952 में आधिकारिक तौर पर भारत के जंगल चीता मुक्त हो गए थे. दावा किया जाता है कि आखिरी चीते को छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में वहां के महाराजा ने शिकार के लिए मार डाला था. उसके बात से भारत के जंगलों में चीतों को खोजने के प्रयास हुए, लेकिन कहीं कोई चीता नहीं मिला.
1947 की एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल
आजतक ने तत्कालीन कोरिया शाही परिवार की सदस्य और छत्तीसगढ़ में मौजूदा कांग्रेस विधायक अंबिका सिंह देव के साथ बातचीत की. अंबिका, राजा रामानुज प्रताप सिंह देव की पोती हैं. दरअसल, राजा रामानुज प्रताप सिंह का एक तस्वीर इंटरनेट मीडिया पर वायरल है. ये तस्वीर 1947 की है, जिसमें तीन मृत चीतों के साथ राजा को देखे जाने का दावा किया जा रहा है. कहा जाता है कि इस शिकार की घटना के बाद भारत में एशियाई चीते विलुप्त हो गए थे.
अंबिका ने सुनाए बचपन के किस्से
अंबिका बताती हैं कि उनका जन्म 1968 में हुआ था और उनके दादा का 10 साल पहले यानी 1958 में निधन हो गया था, लेकिन उन्हें कई किस्से सुनाए गए. अंबिका ने अपने बचपन की यादों को शेयर किया और बताया कि कैसे वह अपने पूर्वजों के शिकार अभियानों समेत कई किंवदंतियों / कहानियों के साथ बड़ी हुईं.

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