
'मधुशाला में बने गोशाला' , 4 दिन तक मंदिर में रुकीं उमा भारती की MP सरकार से मांग
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पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती लंबे समय से मध्य प्रदेश में सख्त शराब नीति की मांग कर रही हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग पूर्ण शराबबंदी को लेकर नहीं है. वह तो बस चाहती हैं कि शराबबंदी को बेहद सख्ती के साथ लागू किया जाए.
भारतीय जनता पार्टी की दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती राज्य में शराब नीति को और ज्यादा सख्त बनाने की मांग कर रही हैं. इसके तहत ही वे चार दिनों तक भोपाल के एक मंदिर में रहीं. चार दिन बाद मंगलवार को वे मंदिर से रवाना हो गईं. जाने से पहले उन्होंने मध्य प्रदेश में शराब नीति बेहद सख्त करने की मांग करते हुए 'मधुशाला को गोशाला' में बदलने की मांग की.
उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को सीधे तौर पर शराब की खपत से ही जोड़कर देखा जाना चाहिए. उमा भारती ने भोपाल के अयोध्या नगर में शराब की दुकान के पास एक मंदिर में चार दिवसीय प्रवास शुरू किया था, जो 31 जनवरी को खत्म हुआ. बता दें कि उमा मध्य प्रदेश सरकार की नई शराब नीति के सामने आने का इंतजार कर रही हैं.
उमा भारती ने इससे पहले शनिवार को संवाददाताओं से कहा था कि यदि 'नियंत्रित शराब नीति' लागू की जाती है, तो सत्तारूढ़ भाजपा 2003 की तरह अपनी रिकॉर्ड जीत दोहराएगी. एमपी में विधानसभा चुनाव इसी साल दिसंबर में होने हैं. उमा भारती शराब नीति में उचित संशोधन की मांग कर रही हैं, जिसे राज्य सरकार हर साल जारी करती है, और नशामुक्ति को बढ़ावा देने के लिए अधिक नियंत्रण शामिल करती है. उमा ने पहले मंदिर के पास स्थित शराब की दुकान का विरोध किया था.
मध्य प्रदेश सरकार ने किसी तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन आम तौर पर जनवरी के अंत में एक नई शराब नीति की घोषणा की जाती है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्होंने पिछले नवंबर में मध्य प्रदेश में विभिन्न स्थानों का दौरा करने की इच्छा व्यक्त की थी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों सहित उनके कर्मचारियों के लिए व्यवस्था नहीं होने के कारण यह दौरा नहीं हो सका.
उमा ने कहा- मैंने कभी भी पूर्ण शराबबंदी की मांग नहीं की. मैंने कहा था कि अगर मेरे बस में है तो मैं पूर्ण शराबबंदी लागू कर दूंगी. मुझे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर पूरा भरोसा है. मैं 31 जनवरी को शराब नीति पर फैसले का इंतजार करूंगी. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह नहीं चाहतीं कि विपक्षी कांग्रेस को उनके रुख से फायदा हो.

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