
मणिपुर में मंत्री के घर के पास फटा ग्रेनेड, CRPF का जवान घायल
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मणिपुर में एक मंत्री के घर बम विस्फोट किए जाने की घटना सामने आई है. हालांकि घटना से गंभीर स्थिति नहीं उत्पन्न हुई. शनिवार रात करीब 9:50 बजे इम्फाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई में मणिपुर के मंत्री वाई खेमचंद के गेट के पास एक हैंडग्रेनेड फट गया. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोपहिया वाहन पर आए दो अज्ञात व्यक्तियों ने मंत्री के आवास के गेट की ओर हथगोला फेंका.
मणिपुर में अभी भी स्थिति पूरी तरह से शांतिप्रद नहीं बन पाई है. यहां एक मंत्री के घर बम विस्फोट किए जाने की घटना सामने आई है. हालांकि घटना से गंभीर स्थिति नहीं उत्पन्न हुई, लेकिन एक सुरक्षाकर्मी घायल हुआ है. घटना इम्फाल पश्चिम जिले की है. यहां मणिपुर के मंत्री वाई खेमचंद का घर है. जिस वक्त विस्फोट हुआ मंत्री घर पर ही थे. बाद में मणिपुर सीएम भी उनका हाल जानने मंत्री के आवास पर पहुंचे.
शनिवार रात की घटना शनिवार रात करीब 9:50 बजे इम्फाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई में मणिपुर के मंत्री वाई खेमचंद के गेट के पास एक हैंडग्रेनेड फट गया. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोपहिया वाहन पर आए दो अज्ञात व्यक्तियों ने मंत्री के आवास के गेट की ओर हथगोला फेंका.
मौके पर सीएम एन बीरेन सिंह भी पहुंचे यह आवास की बाड़ की दीवार के अंदर गिरकर विस्फोट कर गया. बम हमले के वक्त मंत्री भी अपने आवास पर ही थे. मंत्री के मुताबिक, उनकी कोई धमकी या मांग नहीं है. मंत्री आवास की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के एक जवान की पहचान एसआई दास के रूप में हुई है, जो इस विस्फोट में आंशिक घायल हो गया है. उसके बाएं हाथ की हथेली पर चोट आई है. घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन भी उनके आवास पर पहुंचे और जानकारी ली.
6 अक्टूबर को राज्य में खोले गए थे स्कूल बता दें कि अभी बीते शुक्रवार को ही राज्य सरकार ने मणिपुर के सभी स्कूलों को खोले जाने का आदेश दिया है. राजधानी इम्फाल में बीते महीने के आखिरी में विरोध प्रदर्शन देखने के बाद राज्य सरकार ने 27 सितंबर और 29 सितंबर को स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था. 3 मई को पूर्वोत्तर राज्य में जातीय झड़पें भड़कने के बाद मणिपुर में स्कूल बंद कर दिए गए थे. हिंसा के कारण कुछ महीनों तक बंद रहने के बाद, जुलाई में पूरे मणिपुर में स्कूल फिर से खोले गए.
मणिपुर के जातीय झड़पों में 175 से अधिक लोग मारे गए इस बीच, इंफाल पश्चिम जिले में गुरुवार को ताजा हिंसा भड़क उठी, जहां कम से कम दो घरों में आग लगा दी गई और कई राउंड गोलियां चलाई गईं. मणिपुर में जातीय झड़पों के बाद से 175 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. ये हिंसा तब हुई, जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था. मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि नागा और कुकी सहित आदिवासी 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं.
वायरल हुई थी दो लापता छात्रों की हत्या की फोटो बता दें की बीते दिनों मणिपुर में दो लापता छात्रों की हत्या की फोटो वायरल हुई थी. इसके बाद राज्य में एक बार फिर हालात बेकाबू हो गए थे. राज्य सरकार ने कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने के मद्देनजर 27 और 29 सितंबर को सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था.

देश की सर्वोच्च अदालत ने UGC के नए नियमों से सामान्य वर्ग को नफरती करके फंसाए जाने की आशंका को गंभीरता से लिया है. कॉलेज कैंपस में भेदभाव रोकने के नाम पर 13 जनवरी के नियमों को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है. इसके बाद सामान्य वर्ग की राजनीतिक ताकत और इस मुद्दे के व्यापक मायनों पर चर्चा तेज हो गई है. जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने इसके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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