
भारत में मंकीपॉक्स के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा बहुत कम, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की बैठक
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WHO ने जुलाई 2022 में मंकीपॉक्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बताया था बाद में मई 2023 में इसे रद्द कर दिया था. 2022 से वैश्विक स्तर पर WHO ने 116 देशों से मंकीपॉक्स के कारण 99,176 मामले और 208 मौतों की सूचना दी.
भारत में मंकीपॉक्स के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा बहुत कम है और घबराने की जरूरत नहीं है. स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने ये जानकारी दी है. हालांकि, WHO ने इस बीमारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चिंता बताया है और पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा की है. अधिकारी सूत्रों के अनुसार, भारत में आखिरी मंकीपॉक्स का मामला इस साल मार्च में केरल से रिपोर्ट हुआ था. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से भारत में कुल 30 लैब-कन्फर्म्ड मंकीपॉक्स केस रिपोर्ट किए गए हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय संभवतः एयरपोर्ट और सीपोर्ट जैसे एंट्री पॉइंट वाली जगह को सतर्क रहने की सलाह दे सकता है. साथ ही संदिग्ध मामलों को लेकर दिशानिर्देशों दे सकता है. एक सूत्र ने न्यूज एजेंसी को बताया, 'फिलहाल, भारत में मंकीपॉक्स के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा बहुत कम है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है.'
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की बैठक स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को मंत्रालय, NCDC और ICMR के अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने मंकीपॉक्स की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए सावधानी बरतने के उपाय किए जाएंगे.
बैठक में बताया गया कि मंकीपॉक्स संक्रमण आमतौर पर 2-4 सप्ताह तक चलने वाला सेल्फ-लिमिटिंग होता है और रोगी आमतौर पर ठीक हो जाते हैं. संक्रमण वाले व्यक्ति के साथ लंबे समय तक रहने से यह दूसरों में भी फैल सकता है. यह आमतौर पर यौन मार्ग, शरीर/घाव द्रव के साथ सीधे संपर्क या संक्रमित व्यक्ति के दूषित कपड़े के माध्यम से फैल जाता है.
WHO ने जुलाई 2022 में मंकीपॉक्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बताया था बाद में मई 2023 में इसे रद्द कर दिया था. 2022 से वैश्विक स्तर पर WHO ने 116 देशों से मंकीपॉक्स के कारण 99,176 मामले और 208 मौतों की सूचना दी. डब्ल्यूएचओ द्वारा 2022 की घोषणा के बाद से भारत में कुल 30 मामले सामने आए, जिनमें आखिरी मामला मार्च 2024 में सामने आया था. फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर बारीक नजर रख रहा है.

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