
'भारत की ये कार्रवाई खतरनाक संकेत...', मोदी सरकार के इस कदम पर भड़का चीनी मीडिया, दी चेतावनी
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र यानी इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के बीच प्रशांत द्वीपीय और दक्षिण पूर्व एशियाई देश भारत को एक बैलेंसिंग फैक्टर के तौर पर देख रहे हैं. भारत ने भी पिछले कुछ हफ्तों में फिलीपींस का समर्थन और वियतनाम को गिफ्ट के तौर पर मिसाइल देकर इंडो-पैसिफिक में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत दिया है. भारत के इस कदम पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक ओपिनियन लेख में अपनी भड़ास निकाली है.
चीन और अमेरिका के बीच दिनों-दिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने भी चीन को काउंटर करने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. इंडो-पैसिफिक रीजन में प्रशांत द्वीपीय और दक्षिण पूर्व एशियाई देश जहां भारत को बैलेंसिंग फैक्टर के रूप में देख रहे हैं, वहीं भारत ने भी चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद में फिलीपींस का समर्थन और ऑस्ट्रेलिया के कोकोस द्वीप समूह में दो सैन्य विमान भेजकर इंडो-पैसिफिक में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत दिया है.
चीन को काउंटर करने के लिए भारत किस तरह से अपनी रणनीति पर काम कर रहा है, इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि भारत ने हाल ही में 5,500 समुद्री मील से अधिक की समुद्री यात्रा (पापुआ न्यू गिनी) पर अपने दो युद्धपोत भेजे थे. वहीं, चीन और फिलीपींस के क्षेत्रीय विवाद में भी भारत ने फिलीपींस का समर्थन किया है.
इसके अलावा भारत ने चीन के साथ लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद में शामिल दक्षिण एशियाई देश वियतनाम को एक एक्टिव ड्यूटी मिसाइल कार्वेट उपहार में दिया है. साथ ही ऑस्ट्रेलिया के सशस्त्र बलों के साथ इंट्रोपर्बेलिटी बढ़ाने के उद्देश्य से भारत ने ऑस्ट्रेलिया के कोकोस कीलिंग द्वीप समूह में दो सैन्य विमान भेजे हैं.
ग्लोबल टाइम्स को लगी मिर्ची
भारत के इस कदम पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक ओपिनियन लेख में अपनी भड़ास निकाली है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, "भारत बैलेंसिंग फैक्टर की आड़ में इंडो-पैसिफिक रीजन को और अधिक परेशानियों की ओर धकेल रहा है. भारत को बैलेसिंग की कला सीखने की जरूरत हो सकती है. क्योंकि भारत की वर्तमान रणनीति इस क्षेत्र (इंडो-पैसिफिक रीजन) को टकराव (camp confrontation) या यहां तक कि एक नए कोल्ड वार की ओर धकेलने का जोखिम उठा रही है."
ग्लोबल टाइम्स ने भारत की ओर से इंडो पैसेफिक देशों के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए लिखा है, "भारत की यह कार्रवाई खतरनाक संकेत भेजती है. साथ ही यह बताती है कि भारत न केवल अपने पारंपरिक गुटनिरपेक्ष के रुख से भटक रहा है, बल्कि इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन को रोकने और उसका मुकाबला करने के लिए अमेरिका को खुले तौर पर सहयोग कर रहा है."

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