
बेइज्जती, बदला और साजिश... हैरान कर देगी दिल्ली के ट्रिपल मर्डर की इनसाइड स्टोरी
AajTak
चोरी की खबर मिलते ही पुलिस की टीम फौरन मौका-ए-वारदात की तरफ रवाना हो गई और कुछ ही देर में वहां जा पहुंची. लेकिन जब पुलिस उस चार मंजिला घर में दाखिल हुई तो वहां का मंजर देखकर हैरान रह गई. मामला चोरी का नहीं बल्कि कत्ल का था.
राजधानी दिल्ली में मंगलवार का दिन तीन लोगों का अमंगल कर गया और वो तीनों लोग बेमौत मारे गए. मरने वालों में एक शख्स और उसकी बीवी के अलावा उनकी नौकरानी भी शामिल थी. उनका कत्ल चाकू से गोदकर किया गया था. मौका-ए-वारदात पर खून ही खून दिख रहा था. बड़ा ही खौफनाक मंजर था. अब सवाल ये था कि आखिर वो मरने वाले तीनों लोग कौन थे? उनके कत्ल की क्या वजह थी? कातिल कौन थे? इन सब सवालों के जवाब जानने के लिए हमें इस हत्याकांड की पूरी कहानी को जानना होगा. मंगलवार, सुबह 9:15 बजे, दिल्ली दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में फोन बजने लगा. फोन उठाने पर ऑपरेटर को जानकारी मिली कि हरि नगर थाना इलाके के अशोक नगर में एक मकान को चोरों ने अपना निशाना बनाया है. यानी उस मकान में चोरी की वारदात हुई है. ये खबर मिलते ही पुलिस की टीम फौरन मौका-ए-वारदात की तरफ रवाना हो गई और कुछ देर में ही वहां जा पहुंची. लेकिन जब पुलिस उस चार मंजिला घर में दाखिल हुई तो वहां का मंजर देखकर हैरान रह गई. असल में यह मामला चोरी का नहीं बल्कि कत्ल का था, वो भी तीन-तीन कत्ल.
चोरी नहीं ट्रिपल मर्डर पुलिस ने घर की पहली मंजिल से एक शख्स की लाश बरामद की. जबकि ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद पार्किंग एरिया से दो महिलाओं की लाश पुलिस को मिली. तीनों लोगों का कत्ल तेजधार हथियार यानी किसी चाकू से गोदकर किया गया था. घर के अंदर का मंजर बेहद खौफनाक था. हर तरफ मरने वालों का खून देखा जा सकता था. पुलिस ने पूरे मकान की छानबीन की. फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया.
कौन थे मरने वाले तीन लोग पुलिस को अशोक नगर के उस मकान से तीन लोगों की लाशें मिली. जिनमें एक मर्द और दो औरतें शामिल थीं. पहली लाश थी कारोबारी समीर आहूजा की. जो अपनी पत्नी शालू और तीन साल की मासूम बेटी के साथ उस घर में रहते थे. समीर आहूजा कपड़े और प्रॉपर्टी का काम करते थे. वह करीब साल भर पहले ही विकासपुरी के बुडैल्ला इलाके से आकर यहां अशोक नगर में बस गए थे. वे ज्यादा लोगों से बातचीत नहीं करते थे. समीर आहूजा की पत्नी भी काम करती थी. वो अपना ब्यूटी पार्लर चलाती थीं. दूसरी लाश शालू की ही थी. और अब बात तीसरी लाश की, जो शालू के साथ पार्किंग एरिया में पुलिस को मिली थी. वो लाश थी उनकी नौकरानी सपना की, जो उनके घर में काम करती थी.
बच गई मासूम की जिंदगी जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मकान के एक कमरे में तीन साल की मासूम बच्ची भी सो रही थी. लेकिन कातिलों ने उस बच्ची को हाथ तक नहीं लगाया था. वो बच्ची मरने वाली दंपत्ति की बेटी थी. पुलिस ने शुरुआती तफ्तीश के दौरान ही लगने लगा था कि हो ना हो कातिल इस परिवार को जानते थे. इस तिहरे हत्याकांड के पीछे दुश्मनी और आपसी रंजिश का अंदेशा लग रहा था.
एक सीसीटीवी कैमरे में कैद थे कातिल पुलिस ने तीनों लाशों को पंचनामे के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए रवाना कर दिया. अब पुलिस घर का चप्पा-चप्पा छान रही थी. पुलिस ने इसी दौरान देखा कि घर में सीसीटीवी कैमरे लगे थे. मगर कातिल वारदात को अंजाम देकर घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी अपने साथ ले गए थे. मगर उस वक्त पुलिस को राहत मिली, जब एक सीसीटीवी की फुटेज पुलिस को मिल गई और उसमें कातिल कैद थे. सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा था कि आरोपी सुबह करीब 8 बजे 2 बाइक पर सवार होकर समीर आहूजा के घर पहुंचे थे. इसके बाद वे सुबह करीब 9 बजे वारदात को अंजाम देकर वहां निकलते दिख रहे थे.
घर से गायब था कीमती सामान जांच में जुटी पुलिस का मानना था कि इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने वाले कातिलों की संख्या 4 से 5 थी. और घर से कैश, कीमती सामान, आईफोन, लैपटॉप वगैरह भी गायब था. पुलिस ये मानकर चल रही थी कि कत्ल की वारदात को अंजाम देने बाद आरोपियों ने घर की तलाशी ली और सारा कीमती सामान भी उठा लिया था.

जंग के 26 दिन हो गए हैं. महायुद्ध अजीब मोड़ पर है. एक तरफ युद्ध विराम के काउंटडाउन की कयासबाजी है. तो दूसरी तरफ युद्ध की विभीषिका है. युद्ध का आगाज कर दुनिया को तबाही की आग में झोंकने वाला अमेरिका अब शांति की माला का जाप कर रहा है. लेकिन ये नहीं बता रहा है कि आखिर अमेरिका की ईरान में बातचीत किससे हो रही है.

आज जंग को 26 दिन बीत चुके हैं. ईरान हार मानने को तैयार नहीं है. ट्रंप अपनी जीत का ऐलान करते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति अब ये दावा कर रहे हैं कि ईरान बातचीत को तैयार है. होर्मुज को लेकर ईरान से गिफ्ट मिलने का दावा भी ट्रंप ने कर दिया है. अमेरिका एक बार फिर भूमिगत परमाणु हथियारों के परीक्षण पर विचार कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी संस्थानों और स्कूलों में प्रतिदिन 'वंदे मातरम' गायन अनिवार्य करने के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. अदालत ने याचिका को 'प्री-मैच्योर' करार देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार की यह गाइडलाइन केवल एक सलाह है और इसके उल्लंघन पर किसी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है.










