
बाबा का काफिला, बेकाबू भीड़ और मौत का तांडव... हाथरस में 121 जान लेने वाली भगदड़ का सच इन 4 थ्योरीज में
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तबाही, मौत, चीत्कार और कंद्रन की तस्वीरें यूपी के हाथरस से सामने आईं. हाथरस के सिकंदराऊ इलाके में एक सत्संग में भगदड़ के भूत ने ऐसा कोहराम मचाया कि देखते ही देखते पूरे इलाके में लाशें ही लाशें बिछ गईं. अब इसे शासन-प्रशासन की लापरवाही कहें, सत्संग के आयोजकों की नासमझी.. हर तरफ मौत का मातम था.
दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर हाथरस के एक गांव में भोले बाबा का सत्संग था. पहले से ही इस सत्संग के पोस्टर छप चुके थे. सत्संग के लिए गांव के ही एक खुले खेत को चुना गया था. मंगलवार सुबह से ही हाथरस के आस-पास भारी गर्मी और बेहद तेज उमस थी. इस उमस भरे माहौल में सत्संग की जगह पर यूपी, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली से करीब सवा लाख भक्त सत्संग में शामिल होने के लिए पहुंचे थे. लेकिन सत्संग खत्म होने के बाद जैसे ही भोले बाबा वहां से निकले, वहां मौजूद भक्तों की भीड़ वहां से निकलने के लिए या यूं कहें कि बाबा के चरणों की धूल लेने के लिए दौड़ पड़ी और फिर वो हुआ, जिसने पूरे देश को दहला कर रख दिया.
2 जुलाई 2024, दोपहर के पौने 2 बजे, फुलरई गांव, हाथरस दरअसल, मंगलवार को भोले बाबा का सत्संग ठीक-ठाक निबट चुका था. सत्संग निपटाने के बाद अब बाबा का काफिला वापस लौट रहा था. चूंकि भीड़ बहुत ज्यादा थी, रास्ता एक. लिहाजा बाबा के काफिले को निकालने के लिए श्रद्धालुओं के रेले को रोक दिया गया. इत्तेफाक से तब तक बहुत से श्रद्धालु तेज गर्मी और उमस के चलते बेहोश हो चुके थे. उनके अपने उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकालना चाहते थे. लेकिन बाबा के काफिले की वजह से उनका रास्ता रुका हुआ था. और बस यहीं से भगदड़ की शुरुआत हुई. एक ऐसी भगदड़ जिसमें एक बार जो गिरा फिर वो उठ ही नहीं पाया. और हमेशा की तरह इन गिरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं, बच्चे थे और बुजुर्ग थे. देखते ही देखते हजारों पांव तले सौ से ज्यादा जिंदगियां कुचल गईं. अब रास्ते पर काफिले की जगह हर तरफ बस लाशें पड़ी थी.
भगदड़ के भूत का कोहराम तबाही, मौत, चीत्कार और कंद्रन की तस्वीरें यूपी के हाथरस से सामने आईं. हाथरस के सिकंदराऊ इलाके में एक सत्संग में भगदड़ के भूत ने ऐसा कोहराम मचाया कि देखते ही देखते पूरे इलाके में लाशें ही लाशें बिछ गईं. अब इसे शासन-प्रशासन की लापरवाही कहें, सत्संग के आयोजकों की नासमझी या फिर कुछ और, सिर्फ एक काफिले से आगे निकलने के चक्कर में लोगों के बीच ऐसी अरफातफरी मची कि देखते ही देखते इस अफरातफरी ने भगदड़ की शक्ल अख्तियार कर ली और लोग बेमौत मारे जाने लगे.
बाबा के अनुयायियों का रेला ये सत्संग एक बाबा का था. नाम है भोले बाबा उर्फ नारायण हरि सरकार. अब इन बाबा के अनुयायियों का रेला कितना बड़ा है, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगाइए कि इस एक अकेले सत्संग में करीब सवा लाख लोग पहुंचे थे. और इतनी भीड़ के बीच, इस भीषण उमस भरी गर्मी में बदइंतज़ामी के आलम में कई लोगों की हालत पहले ही बेहोश हो जाने जैसी थी, ऊपर से भगदड़ मचते ही मानों मौत के पंजे ने यहां लोगों को कुचलना शुरू कर दिया. इस भगदड़ का सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं और बच्चे हुए, जो भागने की कोशिश में नीचे गिरते गए और ऊपर से भीड़ उन्हें कुचलती हुई आगे बढ़ती गई.
तपती धरती पर छटपटाती इंसानियत हर तरफ बिखरी लाशें, जगह-जगह तड़पते लोग, सत्संग स्थल से लेकर पूरे रास्ते तक और यहां तक अस्पताल तक में तवे की तरह तपती धरती पर छटपटाती इंसानियत, जिसने भी ये मंजर देखा, उसकी रूह कांप गई. एक साथ इतने लोगों की मौत की खबर जब जिला प्रशासन से होती हुई राज्य सरकार तक पहुंची तो खुद सीएम योगी आदित्यनाथ को भी एक्शन में आना पड़ा. उन्होंने कई राहत और बचाव टीमों को मौके के लिए रवाना किया.
एडीजी आगरा और कमिश्नर अलीगढ़ को पूरे हादसे की जांच के आदेश दिए गए. सूबे के चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह और डीजीपी प्रशांत कुमार ने भी हाथरस का रास्ता लिया. वैसे तो सत्संग वाली जगह मची भगदड़ की असली वजह का पता शायद जांच के बाद ही चल पाए, लेकिन फौरी तौर पर इसे लेकर कई बातें कही जा रही हैं.

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