
बसपा की एंट्री से त्रिकोणीय हुआ UP का उपचुनाव, जानें कैसे बिगाड़ रही सपा-भाजपा का खेल
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यूपी की जिन नौ सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें से सात सीटों पर बसपा तीसरे और एक सीट पर दूसरे नंबर पर रही थी. जानिए वो सीटें कौन सी हैं और कहां-कहां बसपा इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है.
यूपी की नौ विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों में मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी उम्मीदवार उतारे हैं. सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए नाक का सवाल बन गए ये उपचुनाव बसपा के लिए जीत और हार से ज्यादा अस्तित्व की लड़ाई माने जा रहे हैं.
साल 2022 के यूपी चुनाव में केवल एक विधानसभा सीट और 2024 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटने के बाद बसपा के लिए ये उपचुनाव अपने कोर वोटर को अपने पाले में बनाए रखने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है. आंकड़ों के आइने में देखें तो बसपा को पूरी तरह से खारिज कर नहीं किया जा सकता. गौरतलब है कि बसपा ने पहली बार किसी उपचुनाव में फुल फ्लेज अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
यूपी की नौ सीटों कटेहरी, करहल, मझवां, फूलपुर, मीरापुर, कुंदरकी, खैर, गाजियाबाद और सीसामऊ के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. इन नौ में से एक विधानसभा सीट पर 2022 के यूपी चुनाव में बसपा दूसरे नंबर पर रही थी. सात सीटें ऐसी भी हैं जहां मायावती की अगुवाई वाली पार्टी के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे थे. ऐसे में मायावती की पार्टी इन आठ सीटों पर चुनावी फाइट को त्रिकोणीय बना सकती है. उपचुनाव वाली सीटों पर 2022 के चुनाव में बसपा का प्रदर्शन कैसा रहा था?
मझवां
मिर्जापुर जिले की मझवां विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में बसपा तीसरे नंबर पर रही थी. मझवां सीट पर बसपा उम्मीदवार पुष्पलता बिंद को 52 हजार 990 वोट मिले थे. इस सीट से बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से निषाद पार्टी के विनोद कुमार बिंद 1 लाख 3 हजार 235 वोट पाकर विजयी रहे थे. सपा के रोहित शुक्ला तब 69 हजार 648 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे.
इस बार बसपा ने इस सीट पर इस बार ब्राह्मण कार्ड चला है. मायावती ने मझवां सीट से दीपक तिवारी को टिकट दिया है. बसपा की कोशिश ब्राह्मण और दलित समीकरण के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की है. बीजेपी से पूर्व विधायक शुचिस्मिता मौर्या और सपा से डॉक्टर ज्योति बिंद मैदान में हैं. इस विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक समीकरणों की बात करें तो अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक यहां 70 हजार से अधिक बिंद, करीब 70 हजार ही दलित, 65 हजार के करीब ब्राह्मण, 38 हजार के करीब कोइरी बिरादरी के मतदाता हैं.

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