
फेयरवेल स्पीच में बाइडेन के टारगेट पर अमेरिका के 'Super Rich', बोले- इनके चंगुल से देश को निकालना होगा
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अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि मैं हमेशा सोचता रहा हूं कि हम असल कौन हैं और हमें क्या बनना चाहिए. उन्होंने न्यूयॉर्क में स्थापित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का हवाला देते हुए कहा कि ठीक इस प्रतिमा की तरह अमेरिका का विचार सिर्फ एक व्यक्ति की उपज नहीं है बल्कि इस दुनियाभर के अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने मिलकर सींचा है.
अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति के तौर पर जो बाइडेन ने आज आखिरी बार देश को संबोधित किया. उन्होंने ओवल ऑफिस से दी अपनी फेयरवेल स्पीच में देश की की सुपर रिच क्लास पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अमेरिकी समाज में दौलतमंदों (oligarchy) का बोलबाला बढ़ रहा है, जो खतरनाक रूप ले रहा है.
बाइडेन ने कहा कि मैं देश को कुछ खतरों से आगाह करना चाहता हूं, जो बड़ा खतरा बन सकते हैं. आज ताकत मुट्ठीभर लोगों के हाथों में सिमटकर रह गई है. मुट्ठीभर दौलतमंद लोगों के हाथों में शक्ति का केंद्रीकरण खतरनाक है जिससे देश के लोकतंत्र को खतरा बना हुआ है. इससे लोगों के बुनियादी अधिकारों को भी खतरा है क्योंकि इससे आगे बढ़ने के लिए सभी को मिलने वाले निष्पक्ष मौके खत्म हो जाएंगे.
उन्होंने कहा कि देश को इनके चंगुल से बाहर निकालना होगा. अमेरिका होने का मतलब यही है कि सभी को निष्पक्ष मौके मिलें. लेकिन आप मेहनत करना नहीं छोड़ना क्योंकि आपकी मेहनत और आपकी प्रतिभा ही आपको आगे ले जा सकती है.
Misinformation और Disinformation के भंवर में फंसा है अमेरिका
बाइडेन ने कहा कि आज के समय में एक और बड़ी समस्या गलत सूचनाओं और सही सूचनाओं का अभाव है. आज प्रेस पर भारी दबाव है. स्वतंत्र मीडिया खत्म हो रही है, संपादक गायब हो रेह हैं.
बाइडेन ने कहा कि मैं हमेशा सोचता रहा हूं कि हम असल कौन हैं और हमें क्या बनना चाहिए? उन्होंने न्यूयॉर्क में स्थापित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रतिमा की तरह अमेरिका का विचार सिर्फ एक व्यक्ति की उपज नहीं है बल्कि इस दुनियाभर के अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने मिलकर सींचा है.

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