
प्रमोद कृष्णम: कितने संत और कितने नेता... कैसा रहा सियासी और आध्यात्मिक सफर?
AajTak
संभल स्थित कल्कि धाम के सर्वेसर्वा आचार्य प्रमोद कृष्णम चर्चा में हैं. धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर गजल गायकी, शायरी और मुशायरों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाले प्रमोद कृष्णम के जीवन में राजनीति और अध्यात्म बराबर बसते हैं. उन्होंने मात्र 17 साल में राजीव को कांग्रेस के साथ वफादारी का वचन दिया था. तो आज पीएम मोदी ने उनके निमंत्रण को स्वीकार किया और उनके कल्कि धाम पर पहुंचे.
लहराती सफेद दाढ़ी,सफेद वस्त्र और इन सफेदियों के बीच ललाट पर लाल तिलक.आचार्य प्रमोद कृष्णम पहली ही नजर में ठेठ हिन्दू संत से अपनी अलग एक छवि पेश करते हैं.हिन्दुत्व के भगवा ब्रांड के बीच उनका सफेद रंग चुनना उनकी विचारधारा और अध्यात्म को अलग पहचान देता रहा है. हालांकि इस अलग पहचान के पीछे उनका कांग्रेसी अतीत भी है, जिससे अभी-अभी वो 'मुक्त'हो चुके हैं.
कुछ ही दिन पहले उन्होंने कांग्रेस के साथ अपने 40 साल पुराने जुड़ाव को ये कहते हुए खत्म कर लिया था कि राम और राष्ट्र के साथ समझौता नहीं किया जा सकता. इस संबंध विच्छेद के लिए उन्हें राजीव गांधी को 40 साल पहले मात्र 16-17 की उम्र में दिये एक वादे को भी तोड़ना पड़ा, लेकिन प्रमोद कृष्णम कांग्रेस से इस विदाई के लिए पार्टी को ही दोष देते हैं.
भगवान कल्कि की भक्ति
राजीव को वचन देने की ये कहानी बताएंगे, लेकिन इससे पहले एक हिन्दू पौराणिक कथा समझनी होगी. हम जानते हैं कि हिन्दुओं में भगवान विष्णु के 10 अवतार की मान्यता है. विष्णु के 10वें अवतार भगवान कल्कि हैं. जिनका धरती पर आगमन होना है. कहा जाता है कि कलियुग के अंत में भगवान कल्कि धरती पर आएंगे. बचपन से ही वेद-पुराणों में रुचि रखने वाले प्रमोद कृष्णम इन्हीं भगवान कल्कि को अपना मुख्य अराध्य मानते हैं.
4 जनवरी 1965 को बिहार में एक ब्राह्मण परिवार में पैदा लेने वाले प्रमोद कृष्णम ने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की है. इन्होंने अपने जीवन में राजनीति और अध्यात्म दोनों से नाता रखा. राजनीति इनके पेशेवर जीवन में दिखता है तो अध्यात्म निजी जीवन में.
आचार्य प्रमोद कृष्णम का सार्वजनिक जीवन इन्हीं कल्कि भगवान के इर्द-गिर्द घुमता है. 1990 में उत्तर प्रदेश के संभल में उन्होंने कल्कि फाउंडेशन की स्थापना की. फिर 1996 में कल्कि धाम की स्थापना उनके द्वारा की गई. इसी धाम में पीएम मोदी ने 19 फरवरी 2024 को कल्कि मंदिर की आधारशिला रखी है.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?

जब UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्र सड़कों पर विरोध कर रहे थे और ये कह रहे थे कि उन्हें ज़बरदस्ती अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, तब सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिससे छात्रों को राहत मिली है. यह कदम छात्रों के अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय और हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है.







