
'पीठ में छुरा घोंपना अमेरिका की आदत', PM मोदी के US दौरे से चीन को लगी मिर्ची
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ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में भारत को अमेरिका से सावधान रहने को कहा गया है. इस लेख में कहा गया है कि अमेरिका लंबे समय से चीन से निपटने के लिए भारत का सहारा लेता रहा है. लेकिन भारत को सावधान रहने की जरूरत है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर थे. इस दौरान अमेरिका ने दिल खोलकर पीएम मोदी का स्वागत किया. उनका यह दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक भी रहा. लेकिन अमेरिका से भारत की बढ़ती दोस्ती को लेकर अब चीन ने नसीहत दे डाली है. पड़ोसी देश चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका से दोस्ती को लेकर भारत को चेताया है.
ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में भारत को अमेरिका से सावधान रहने को कहा गया है. इस लेख में कहा गया है कि अमेरिका लंबे समय से चीन से निपटने के लिए भारत का सहारा लेता रहा है. लेकिन भारत को अमेरिका से पूरी तरह से सावधान रहने की जरूरत है.
इस लेख में कहा गया कि अमेरिका की आदत है कि वह जियोपॉलिटिक्स को सत्ता और ताकत के चश्मे से देखता है. वह द्विपक्षीय संबंधों को लेनदेन की कसौटी पर परखता है. अमेरिका ऐसे देशों से गठजोड़ करता है, जिनसे उसे लाभ हो सके. अमेरिका फिर इन लाभों के आधार पर देशों को वरीयता देता है. इस लेख में अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर के हवाले से कहा गया कि उन्होंने एक बार कहा था कि अमेरिका का कोई स्थाई दोस्त नहीं है, उसके हित केवल स्थाई होते हैं.
स्वार्थों पर टिके हैं अमेरिका और भारत के रिश्ते
चीन के सरकारी अखबार में कहा गया कि अमेरिका दूसरे देशों की सद्भावना के बल पर सुपरपावर नहीं बना है बल्कि दूसरे देशों के डर को भुनाकर वह इस मुकाम तक पहुंचा है. लेकिन आज चीन को लेकर अमेरिका के खुद के डर की वजह से वह सहयोगी देशों की तलाश में है.
इस लिहाज से अमेरिका के लिए भारत बिल्कुल सही सहयोगी है क्योंकि भारत उसके सभी लक्ष्यों की पूर्ति कर सकता है. यही वजह है कि जहां एक तरफ अमेरिका भारत के प्रधानमंत्री मोदी की स्टेट विजिट के लिए रेड कार्पेट बिछा रहा था तो दूसरी तरफ विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्र का हवाला देकर अमेरिका एक प्रोपेगैंडा भी चला रहा था, जिसमें भारत और अमेरिका के साझा हितों और मूल्यों (चीन का विरोध) को पेश किया जा रहा था. मोदी भारत के पहले और दुनिया के तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री बन गए हैं, जिन्होंने दो बार अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया है.

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