
'पिता जी से पैसे लेकर सड़कें बनवाईं...', अखिलेश के बयान पर भावुक हुए केशव मौर्य, बोले- पिता का अपमान किया
AajTak
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मेरे पिता नहीं हैं, अखिलेश के इस बयान से मैं काफी आहत हूं. सदन में इस तरीके का व्यवहार अखिलेश को शोभा नहीं देता.
यूपी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच तू-तड़ाक का मामला सुर्खियों में है. इस मामले पर आजतक से बात करते हुए डिप्टी सीएम केशव मौर्य भावुक हो गए. केशव मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव ने मेरे दिवंगत पिता का अपमान किया है.
डिप्टी सीएम ने कहा कि मेरे पिता नहीं हैं, उनके इस बयान से मैं काफी आहत हूं. सदन में इस तरीके का व्यवहार अखिलेश यादव को शोभा नहीं देता. केशव मौर्य ने कहा कि मैंने सिर्फ उप नेता होने के नाते अपनी बात सदन में रखी थी, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का व्यवहार बिल्कुल भी संसदीय और शिष्टाचार के अनुरूप नहीं था.
क्यों हुआ था सदन में हंगामा?
दरअसल, बुधवार को विधानसभा में अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम से सवाल किया था कि आपके जिले के मुख्यालय की सड़क किसने बनवाई? इसके जवाब में केशव मौर्य ने पिछली सपा सरकार को घेरते हुए कहा था कि जो लोग सड़क, एक्सप्रेस-वे जैसी बातें करते हैं. ऐसा लगता है जैसे इन्होंने सैफई बेच कर ये सब करवाया हो.
केशव मौर्य के इस बयान पर अखिलेश भड़क गए. उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, 'तुम अपने पिता जी से लाते हो ये सब बनवाने के लिए...' इस पर विधानसभा में माहौल काफी गर्म हो गया.
इस घमासान के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ को जवाब देना पड़ा. सीएम योगी ने कहा कि सदन में अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल सही नहीं है. आप और हम सब जनता के लिए विकास करते हैं. उप-मुख्यमंत्री सही बोल रहे थे. सबको अपनी बात रखने का अधिकार है. सीएम ने कहा कि आप भाषा को लेकर असहमति जता सकते हैं. सदन में तू-तू, मैं-मैं नहीं होना चाहिए.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








