पार्टी और सिंबल पर कब्जा... फिर भी शिवसेना भवन का मालिक क्यों नहीं बन सकता शिंदे गुट?
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शिवसेना की विरासत पर कानूनी लड़ाई के बाद अब पार्टी की संपत्ति और फंड पर शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच जंग नजर आ रही है. चुनाव आयोग (ECI) द्वारा शिंदे गुट को पार्टी का नाम और 'धनुष और तीर' चिह्न दिए जाने के बाद सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने विधानसभा में पार्टी विधायक दल के कार्यालय पर कब्जा कर लिया.
पार्टी का नाम और पहचान वाली लड़ाई में जीत हासिल होने के बाद अब शिंदे गुट ने विधानसभा में शिवसेना के पार्टी दफ्तर पर भी कब्जा जमा लिया है. इस कदम के साथ उन्होंने भविष्य की सियासत को लेकर अपना इरादा जता दिया है. क्योंकि चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ उद्धव गुट की सुप्रीम कोर्ट में अपील के बाद ये बात तो एकदम साफ है कि महाराष्ट्र में शिवसेना वाला संघर्ष जल्द थमने वाला नहीं है. चुनाव चिन्ह के बाद दफ्तरों, इमारतों पर कब्जे की जंग शुरू हो गई है. शिवसेना के कार्यालय, शाखा, डोनेशन, संपत्ति और फंड पर दावा उद्धव गुट के लिए चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है.
हालांकि जानकारों की माने तो शिंदे गुट पार्टी और सिंबल पर कब्जे के बाद भी शिवसेना भवन और अन्य संपत्तियों का मालिक नहीं बन सकता. कारण, शिवसेना के अधिकांश संपत्ति किसी राजनीतिक पार्टी के नाम नहीं बल्कि अलग-अलग ट्रस्ट के नाम पर हैं और इसलिए इन पर शिवसेना बतौर राजनीतिक पार्टी दावा नहीं कर सकती. इन ट्रस्ट में उद्धव ठाकरे समेत उनके गुट के तामाम लोग शामिल हैं.
दरअसल, शिवसेना की विरासत पर कानूनी लड़ाई के बाद अब पार्टी की संपत्ति और फंड पर शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच जंग नजर आ रही है. चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा शिंदे गुट को पार्टी का नाम और 'धनुष और तीर' चिह्न दिए जाने के बाद सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट ने विधानसभा में पार्टी विधायक दल के कार्यालय पर कब्जा कर लिया. लेकिन जानकारों की मानें तो कानूनी रूप से शिंदे गुट शिवसेना भवन और अन्य संपत्तियों का मालिक नहीं बन सकता.
मुंबई के वकील ने दायर की शिकायत में दी जानकारी
पार्टी कार्यालयों पर विवाद के बीच मुंबई के एक वकील योगेश देशपांडे द्वारा हाल ही में सिटी चैरिटी कमिश्नर के पास दायर की गई शिकायत से पता चला है कि मुंबई में स्थित शिवसेना भवन शिव सेवा ट्रस्ट के स्वामित्व में है. इस शिकायत में बताया गया है कि कैसे एक सार्वजनिक ट्रस्ट की संपत्ति को कई दशकों तक एक राजनीतिक कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. माना जा रहा है कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट दोनों गुटों का दावों में बाधा उत्पन्न कर सकता है.
ट्रस्ट में इन लोगों ने नाम शामिल

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