पाक-अफगान बॉर्डर पर ताबड़तोड़ फायरिंग, कई नागरिक घायल, सीमा की तरफ बढ़ रहे तालिबानी लड़ाके
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चमन-स्पिन बोल्डक सीमा पर अफगानी तालिबानी लड़ाकों और पाकिस्तानी सुरक्षबलों के बीच संघर्ष जारी है. पाकिस्तान के मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दोनों तरफ से लगातार फायरिंग जारी है और इसमें कई नागरिक घायल हुए हैं. लगातार गोलीबारी के बीच तालिबानी लड़ाके बॉर्डर की तरफ बढ़ रहे हैं.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा पर एक बार फिर संकट गहरा गया है. पिछले कई दिनों से दोनों तरफ से गोलीबारी जारी है. जिसमें कई नागरिकों के घायल होने की सूचना है. दरअसल, चमन-स्पिन बोल्डक सीमा पर अफगानी तालिबानी लड़ाकों और पाकिस्तानी सुरक्षबलों के बीच संघर्ष जारी है. पाकिस्तान के मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दोनों तरफ से लगातार फायरिंग जारी है और इसमें कई नागरिक घायल हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस संघर्ष में अब तक दो घायलों को अस्पताल में शिफ्ट किया गया है. लगातार गोलीबारी के बीच तालिबानी लड़ाके बॉर्डर की तरफ बढ़ रहे हैं. वहीं सीमा पर चल रही सैन्य स्थिति के कारण बलूचिस्तान में के सभी अस्पतालों के लिए आपातकाल की घोषणा की गई है.
बता दें कि इससे पहले 11 दिसंबर को भी दोनों तरफ से ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई थी. जिसमें 6 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत होने की बात कही गई थी. वहीं 17 से अधिक लोग घायल बताए गए थे. इसको लेकर पाकिस्तानी सेना ने बयान जारी किया था. जिसमें दावा किया गया था बिना किसी उद्देश्य के उनके नागरिकों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई. सेना ने आरोप लगाया था कि तालिबान द्वारा तोपखाने और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया.
क्यों सीमा पर हो रही हिंसा?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान डूरंड लाइन के जरिए अलग होते हैं. ये एक रेखा है जो बताती है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान का एरिया कहा तक है. लेकिन विवाद इस बात को लेकर है कि तालिबान हमेशा से ही खैबर पख्तूनख्वा राज्य को अपने देश का हिस्सा मानता है. जब से उसकी अफगानिस्तान मे सरकार बनी है, उसने कई मौकों पर पाक को धमकी दी है कि तुरंत इस इलाके को खाली किया जाए. इसी वजह से बॉर्डर पर पिछले 6 से 7 महीनों में कई बार हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं.
एक तरफ अफगान की फौज आक्रमक है तो पाक भी इस इलाके की रक्षा करने के लिए अपनी आर्मी को जमीन पर और ज्यादा सक्रिय कर रहा है. इसी कड़ी में पिछले महीने ही पाकिस्तान की विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार भी अफगानिस्तान गई थीं. उनकी वहां सरकार के तमाम बड़े अधिकारी और मंत्रियों से मुलाकात हुई. लेकिन लगातार हो रहे हमले बता रहे हैं कि वो बातचीत भी फेल रही है और जमीन पर उसका ज्यादा असर नहीं रहा.

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