
पहले कम निवेश और अच्छा मुनाफा, फिर ठग लेते थे मोटी रकम, चीनी गिरोह ने कर डाला 712 करोड़ का फ्रॉड
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तेलंगाना पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम गिरोह का खुलासा किया है. ये रैकेट निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करता था. पहले लोगों को कम निवेश पर अच्छा खासा मुनाफा देता था. लोगों की कमाई बढ़ती तो वो निवेश में ज्यादा रुचि दिखाने लगते और यहीं से ठगी का पूरा खेल शुरू हो जाता था. शातिर ठग धीरे-धीरे अपने जाल में फंसा लेते थे और बड़ी रकम के निवेश करने पर नुकसान दिखा देते थे और वो पैसे हड़प लेते थे.
तेलंगाना की हैदराबाद पुलिस ने निवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है. शातिर ठग चीनी ऑपरेटर्स हैं और किप्टोवॉलेट के नाम पर फ्रॉड करते थे. पुलिस का कहना है कि उसने 712 करोड़ रुपये के क्रिप्टोवॉलेट निवेश की धोखाधड़ी का पता लगाया है. इस सिलसिले में देश के अलग-अलग जगहों से 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, इस क्रिप्टोवॉलेट निवेश के लेनदेन का लिंक हिजबुल्लाह वॉलेट (टेरर फाइनेंसिंग मॉड्यूल से संबंधित) से पाया गया है. साइबर क्राइम पुलिस ने हैदराबाद निवासी युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की थी.
शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे एक मैसेजिंग ऐप के माध्यम से 'रेटिंग और समीक्षा' के लिए अंशकालिक नौकरी का ऑफर दिया गया था. वह बातों में आ गया और उसने संबंधित वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करा दिया. शुरुआत में उसने 1,000 रुपये का निवेश किया. उसे फाइव स्टार रेटिंग दी गई और 866 रुपये का लाभ मिला. उसके बाद शिकायतकर्ता ने 25,000 रुपये का निवेश किया तो 20,000 रुपये का मुनाफा हो गया. लेकिन, उसे वापस लाभ लेने की अनुमति नहीं दी गई. उससे आगे पैसा निवेश कराया गया और कुल मिलाकर 28 लाख रुपये का नुकसान हुआ.
6 बैंक अकाउंट में ट्रांसफर 28 लाख रुपए
जांच के दौरान पाया गया कि पीड़ित ने जो 28 लाख रुपये गंवाए थे, वे 6 अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे. वहां से पैसा अलग-अलग भारतीय बैंक अकाउंट में और अंत में दुबई में ट्रांसफर कर दिए गए. धोखाधड़ी वाले पैसे का इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के लिए किया गया था.
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