पढ़ाई में कॉन्संट्रेट होने के लिए कोई दवा तो नहीं खा रहे? डॉक्टर बोले- संभल जाइए
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बोर्ड परीक्षााओं के तुरंत बाद प्रतियाेेगी परीक्षााएं सामने हैं. छात्रों में एग्जाम के लिए पढ़ाई का प्रेशर इस कदर है कि वो दिन के 12-12 घंटे पढ़ाई में जुटे हैं. वहीं, कुछ प्रतियोगी छात्र पढ़ाई में मन लगाने के लिए मेडिकल स्टोर्स में आसानी से मिल रही दवाओं का सेवन कर रहे हैं. ये दवाएं फायदे के बजाय उन्हें नुकसान कर रही हैं.
कई छात्रों को शिकायत रहती है कि जैसे ही पढ़ाई का मूड बनाकर बैठने से अक्सर नींद आ जाती है. लगातार नींद आने से परेशान या पढ़ाई से मन उचटने वाले छात्र तरह तरह की कोशिशें करते हैं. वहीं कई छात्र खुद को जगाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. मनोचिकित्सकों के पास इन दवाओं के कारण हुई घबराहट, बेचैनी और नींद न आने की जैसी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं.
भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक कहते हैं कि एनर्जी बूस्ट करने के नाम पर मिल रही दवाएं छात्रों को कई तरह की समस्याएं दे रही हैं. बोर्ड परीक्षाओं के दौरान अभी तक मेरे पास छह ऐसे मरीज आ चुके हैं जो कई एग्जाम का एक साथ प्रेशर झेल रहे हैं. उनको खुद को नींद आने से इतनी परेशानी हो गई थी कि वो नींद भगाने के लिए ये दवाएं ले रहे थे. एक छात्र कॉन्संट्रेशन बढ़ाने के लिए ये दवाएं ले रहा था. किसी को दवा की एक डोज तो किसी को दवा खाने के दूसरे ही दिन समस्याएं होने लगीं.
महसूस होता है कंपन
एक छात्र ने बताया कि अब उसे हाथों में कंपन महसूस होता है. पूरी पूरी रात सो नहीं पा रहा और पढ़ाई में कुछ भी याद नहीं कर पा रहा है. ये समस्याएं लेकर पहुंचने वाले छात्रों को तत्काल ऐसी दवाएं खाने से मना किया जाता है. डॉ त्रिवेदी का कहना है कि यह बहुत ही हैरान करने वाली स्थिति है कि छात्र बिना किसी डॉक्टरी परामर्श के आसानी से मेडिकल स्टोर से ऐसी दवाएं ले लेते हैं. भले ही शुरुआत में कुछ छात्रों को इसका फायदा लगता है, लेकिन लांग टर्म में ये दवाएं बहुत नुकसान करती हैं.
शेड्यूल बनाकर पढ़ें
सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ राजीव मेहता का कहना है कि परीक्षा की तैयारी में ध्यान लगाने के लिए हमें वैसा शेड्यूल बनाना होगा जिसमें टाइमिंग हमसे मैच करती हो. यदि आपको रात में जल्दी नींद आ जाती है तो आप शांत मन से सो जाएं और फिर रात में जागकर पढ़ें. लेकिन ऐसी दवाओं के सेवन से बचना चाहिए.

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