
पंजाब के 7 गांवों की कहानी, तीन तरफ पाकिस्तान और सामने पानी के घेरा
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पंजाब के 7 गांव के 3 हजार लोग पानी की वजह से कैद में जीने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ है, तो दूसरी तरफ 4 माह तक पानी की वजह से निकलना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से नाव मुहैया करवा दी जाती है, जिससे यहां रहने वाले लोग अपना काम चलाते हैं.
आजादी के 75 साल बाद भी पंजाब के 7 गांव के तीन हजार लोग जल-कैद में जीने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ है, तो दूसरी तरफ 4 माह तक पानी के घेरे की कैद में रहने की मजबूरी. ऐसे में करें तो क्या करें.
उनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है. स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ से करीब 220 किलोमीटर दूर पंजाब के गुरदासपुर के पास मकौड़ा पत्तन इलाका इन दिनों पानी के बीच घिरा हुआ है. जिसकी वजह से यहां रहने वाले लोगों का हाल-बेहाल है.
पिछले दिनों से हो रही बारिश के चलते रावी दरिया के पास बने मकौड़ा पत्तन पर जलस्तर बढ़ गया है. इसके चलते चेबे, भरियाल, लसियान, कुक्कर, मम्मी चक्क और झूबर गावों पानी भर गया है. हालांकि, बारिश के चलते पहले ही स्थानीय प्रशासन ने पंटून पुल को हटा लिया था. इसकी वजह से दरिया पार बसे सात गांवों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से टूट गया.
पीडब्ल्यूडी विभाग मुहैया कराता है नाव
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार की तरह पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से नाव मुहैया करवा दी जाती है. जिससे यहां रहने वाले लोग अपना काम चलाते हैं. मगर, बारिश के दौरान नाव चलनी भी बंद हो जाती है और सातों गांव के लोग जल-कैदी बन जाते हैं. इनके गांवों के तीन तरफ तो पाकिस्तान है और सामने खतरनाक दरिया.
मकौड़ा पत्तन में पिछले 30 सालों ने नाव चला रहे नक्षत्र सिंह का कहना है कि जब बारिश के चलते पानी का स्तर बढ़ जाता है, तो काफी मुश्किलें हो जाती हैं. इस साल काफी बारिश हुई है, जिसके चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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