
न नाम, न पहचान, लेकिन मुल्क मेहरबान... क्या पहली बार पाकिस्तान में इंडिपेंडेंट बनाएंगे वजीर-ए-आजम?
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Pakistan Election Results 2024 Updates: पाकिस्तान में सरकार बनाने को लेकर नवाज शरीफ और इमरान खान की पार्टी में होड़ शुरू हो गई है. नवाज शरीफ ने सरकार बनाने की बात कही हैं. वहीं सबकी नजर अब उन निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी टिकी है जो सबसे अधिक संख्या में चुनाव जीते हैं. इनमें अधिकांश इमरान खान की पार्टी के समर्थित उम्मीदवार हैं.
पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला लेकिन इमरान समर्थित निर्दलीयों ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं हैं. कुछ सीटों के नतीजे आने बाकी है लेकिन सबसे ज्यादा 100 सीटें निर्दलीयों ने जीती जिन्हें इमरान समर्थित माना जा रहा है. नवाज शरीफ की पार्टी को 71 सीटें मिली है जबकि सहयोगी पार्टी पीपीपी 53 सीटें जीती. इसी तरह एमक्यूएम चौथी सबसे बडी पार्टी बनी और उसको 17 सीटें मिली. 264 सीटों पर चुनाव हुआ था और बहुमत का आंकडा 134 है.
अब सरकार बनाने के लिए नवाज शरीफ और बिलावल भुट्टों ने बात शुरू कर दी है. बिलावल और आसिफ जरदारी लाहौर पहुंच गए है. सरकार बनाने को लेकर नवाज शरीफ और इमरान खान की पार्टी में होड़ शुरू हो गई है. नवाज शरीफ ने सरकार बनाने की बात कही तो इसके जवाब में इमरान खान की पार्टी ने भी कहा कि उनके सबसे ज्यादा सांसद जीते हैं इसलिए वो केंद्र में सरकार बनाएगी.
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इमरान को नहीं मिल सकेगा कोटा चुनावी सफलता के बावजूद, इमरान खान की पार्टी पीटीआई को नुकसान भी हुआ है. चुनाव आयोग के फैसले के कारण उनका चुनावी चिह्न 'बल्ला' जब्त हो गया था जिसकी वजह से उनके समर्थित उम्मीदवार निर्दलीय रूप में चुनावी मैदान में उतरे थे. निर्दलीय उम्मीदवार भले ही सबसे अधिक सीटें जीतने में कामयाब रहे हों लेकिन इमरान की पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी. क्योंकि उसे अल्पसंख्यक सीटों का कोटा आवंटित नहीं किया जाएगा.
ऐसा है रिजर्व सीटों के कोटे का गणित
दरअसल पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 10 सीटें वहां के अल्पसंख्यकों हिंदुओं और ईसाइयों के लिए आरक्षित रहती हैं. नेशनल असेंबली में कुल 336 सीटों में से 266 सीटों पर जनता के वोटों के जरिए सीधे चुनाव होता है और बची हुई 70 सीटें रिजर्व होती हैं जिनमें से 10 सीटें अल्पसंख्यकों (हिंदू और ईसाइयों) तथा 60 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व रहती है.इन सीटों का बंटवारा नेशनल असेंबली में जो दल चुनाव जीतकर आते हैं उनकी जीती गई सीटों के अनुपात में होता है. ऐसे में इमरान को यहां अल्पसंख्यक सीटों का कोटा मिलना नाममुकिन हो गया है.

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