
नीतीश को ओपनिंग में ही जीतना होगा मैदान... पहले चरण में जेडीयू के लिए करो या मरो वाली स्थिति
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बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की तस्वीर साफ हो चुकी है, पहले फेज की 121 सीटों में से जेडीयू 57 सीट पर चुनाव लड़ रही है. इस तरह उसका ज्यादातर सीटों पर मुकाबला आरजेडी से है. ऐसे में जेडीयू के लिए अपने सियासी वर्चस्व को बनाए रखने के लिए पहले चरण की सियासी बाजी अपने नाम करनी होगी, नहीं तो आगे की राह मुश्किल भरी हो जाएगी?
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीट पर 6 नवंबर को मतदान है. सीएम नीतीश कुमार के सियासी भविष्य का फैसला पहले चरण के चुनाव से तय हो जाएगा, क्योंकि जेडीयू अपने कोटे की आधे से ज्यादा सीटों पर मैदान में है. जेडीयू का ज्यादातर सीटों पर मुकाबला आरजेडी से है. इस तरह जेडीयू के लिए पहला चरण का चुनाव करो या मरो वाली स्थिति से कम नहीं है.
जेडीयू बिहार में कुल 101 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें पहले चरण में 57 और दूसरे चरण की 44 सीट पर किस्मत आजमा रही है. यही नहीं, जेडीयू के 2020 में जीते 43 विधायकों में से 23 विधायक यानी आधे से ज्यादा पहले चरण वाली सीटों से जीतकर आए थे. इस लिहाज से समझा जा सकता है कि जेडीयू के लिए कितना अहम है पहले फेज का चुनाव.
नीतीश के लिए कितना अहम बिहार चुनाव
बिहार की सियासत दो दशक से नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है, लेकिन बिहार की सियासी धुरी पर खड़े नीतीश कुमार के लिए इस बार का चुनाव काफी अलग और चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि एनडीए में जेडीयू की भूमिका अब बड़े भाई की नहीं रह गई है. बीजेपी और जेडीयू 101-101 सीट पर यानी बराबर-बराबर सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं.
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