
'निखिल गुप्ता का US प्रत्यर्पण नहीं रोक सकते...', पन्नू की हत्या की साजिश वाले मामले में बोले कानूनी सलाहकार
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पेट्र स्लेपिका ने कहा कि निखिल गुप्ता को निश्चित रूप से अमेरिका में प्रत्यर्पित किया जाएगा. क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्ते बहुत अच्छे हैं. भारत और अमेरिका संधि पार्टनर हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले में भारतीय मिशन ज्यादा मदद नहीं कर रहा है.
खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कथित साजिश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. निखिल गुप्ता के कानूनी सलाहकार पेट्र स्लेपिका ने आजतक से खास बातचीत में कहा कि निखिल गुप्ता वो शख्स नहीं है, जिसकी तलाश की जा रही है. उन्होंने कहा कि जब पैसे का आदान-प्रदान हुआ था तब निखिल अमेरिका में नहीं थे.
इतना ही नहीं, पेट्र स्लेपिका ने कहा कि निखिल गुप्ता को निश्चित रूप से अमेरिका में प्रत्यर्पित किया जाएगा. क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्ते बहुत अच्छे हैं. भारत और अमेरिका संधि पार्टनर हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले में भारतीय मिशन ज्यादा मदद नहीं कर रहा है. वे इसके लिए आगे भी नहीं आ रहे हैं. साथ ही कहा कि सिर्फ एक अमेरिकी एजेंट का बयान ही उपलब्ध है.
पेट्र स्लेपिका ने कहा कि निखिल गुप्ता को अमेरिका में प्रत्यर्पित नहीं किए जाने का कोई रास्ता नहीं है. प्रत्यर्पण रोकने के लिए इस मामले में सिर्फ राजनीतिक हस्तक्षेप ही हो सकता है. साथ ही कहा कि परिवार मेरे माध्यम से निखिल गुप्ता के संपर्क में है.
इस मामले में हाल ही में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पन्नू की कथित हत्या की साजिश के आरोपी निखिल गुप्ता को तीन बार कॉन्सुलर एक्सेस मिला था. निखिल गुप्ता फिलहाल चेक गणराज्य की जेल में बंद है. वहीं, अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि एक अज्ञात भारतीय सरकारी कर्मचारी के निर्देश पर निखिल गुप्ता ने अमेरिका में पन्नू को मारने की साजिश रची थी.
निखिल को 30 जून को अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि एक भारतीय नागरिक फिलहाल चेक गणराज्य की हिरासत में है. उसके प्रत्यर्पण की याचिका फिलहाल लंबित है. हमें तीन बार कॉन्सुलर एक्सेस मिला था.
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि विदेशों में छिपे कुछ चरमपंथी समूह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में डराने-धमकाने और हिंसा भड़काने में लगे हैं. पीएम मोदी ने कहा था कि सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग दोनों देशों के बीच साझेदारी का प्रमुख पैमाना रहा है. मुझे नहीं लगता है कि कुछ घटनाओं को दोनों देशों के राजनयिक संबंधों से जोड़ना उचित है. हमें इस तथ्य को स्वीकार करने की जरूरत है कि हम बहुपक्षवाद के युग में जी रहे हैं. दुनिया एक दूसरे से जुड़ी होने के साथ-साथ एक दूसरे पर निर्भर भी है.

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