
नए साल का जश्न, नहर का किनारा और एक कत्ल... 50 मिनटों में छुपा है पंजाब पुलिस के DSP की मौत का राज़
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पंजाब पुलिस के डीएसपी दलबीर सिंह देओल का स्पोर्ट्स और पुलिस का करियर जितना शानदार रहा, उनकी मौत उतनी ही दर्दनाक और रहस्यमयी हुई. दलबीर सिंह देओल की लाश नए साल के पहले रोज़ यानी 31 दिसंबर 2023 और पहली जनवरी 2024 की दरम्यानी रात जालंधर में एक नहर के पास मिली.
Jalandhar DSP Murder: 31 दिसंबर और 1 जनवरी की दरम्यानी रात जब लोग नए साल के जश्न में डूबे थे. उसी रात जालंधर में एक डीएसपी दलबीर सिंह देओल की गोली मार कर हत्या कर दी गई. वो अपने दोस्तों के साथ घर से निकले थे, लेकिन रात करीब एक बज कर बीस मिनट पर उनकी लाश एक नहर के किनारे पड़ी मिली. उनकी गर्दन में गोली लगी थी, जबकि उनकी सर्विस रिवॉल्वर गायब थी. सीसीटीवी फुटेज में उनकी आखिरी तस्वीर लाश मिलने से करीब 50 मिनट पहले क़ैद हुई थी. जाहिर है डीएसपी की जिंदगी के आखिरी 50 मिनट में ही उनकी मौत का राज छिपा है.
सोची समझी साजिश के तहत DSP का मर्डर पंजाब पुलिस के डीएसपी दलबीर सिंह देओल का स्पोर्ट्स और पुलिस का करियर जितना शानदार रहा, उनकी मौत उतनी ही दर्दनाक और रहस्यमयी हुई. दलबीर सिंह देओल की लाश नए साल के पहले रोज़ यानी 31 दिसंबर 2023 और पहली जनवरी 2024 की दरम्यानी रात जालंधर के बस्ती बाबा खेल के नहर के पास मिली, तो लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. क्योंकि मरने वाला कोई आम आदमी नहीं, बल्कि पंजाब पुलिस का डीएसपी था और उनकी तैनाती जालंधर के ही पीएपी ट्रेनिंग सेंटर में थी. ऊपर से जिस तरह से उनकी लाश पर चोट और गोलियों के निशान थे, वो इस बात का सबूत था कि डीएसपी की मौत कोई मामूली मौत नहीं, बल्कि सोची समझी साजिश के तहत किया गया क़त्ल था.
31 दिसबंर की रात दोस्तों के साथ DSP देओल अब जब मामला डीएसपी के कत्ल का था, तो पुलिस का हरकत में आना लाजिमी था. पुलिस ने मामले की जांच चालू की. पता चला कि 31 दिसंबर की रात को डीएसपी दलबीर सिंह देओल अपने दो दोस्तों के एक गाड़ी में सवार होकर निकले थे. लेकिन डीएसपी देओल कहीं काम से जाने की बात कहते हुए जालंधर बस स्टैंड के पास उतर गए. लेकिन यही वो आखिरी घड़ी थी, जब किसी ने उन्हें जिंदा देखा था.
शक के दायरे से बाहर दोस्त लाश मिलने के बाद पुलिस ने उनकी मौत से पहले के पूरे घटनाक्रम को ट्रैक करना शुरू किया और जल्द ही उनके उन दोस्तों का भी पता चल गया, जिन्होंने उन्हें बस स्टॉप के पास ड्रॉप किया था. दोनों ही दोस्तों ने पुलिस ने पूछताछ की और इस छानबीन में दोनों पुलिस को पूरी तरह कोऑपरेट कर रहे थे. ऐसे में शुरुआती छानबीन में डीएसपी को आखिरी बार जिंदा देखने वाले उनके दो दोस्त शक के दायरे से बाहर हो गए.
खंगाली गई 50 CCTV कैमरों की फुटेज अब सवाल ये था कि नए साल की आधी रात को डीएसपी के साथ आखिर ऐसा क्या हुआ कि उनकी हत्या कर दी गई? पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए जालंधर बस स्टैंड के पास लेकर मौका-ए-वारदात तक के पूरे रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों की स्कैनिंग चालू की. पुलिस ने इस कड़ी में कम से कम 50 सीसीटीवी कैमरों की जांच की. इसमें पुलिस को कई सुराग मिले, लेकिन ठीक लाश मिलने वाली या कत्ल वाली जगह पर कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था, जिससे वारदात का सच साफ होता. ऊपर से डीएसपी के दोस्तों ने कहा कि उनके बस्ती बाबा खेल नहर की तरफ जाने की वजह भी समझ में नहीं आती है, क्योंकि उन्हें उस तरफ कोई काम नहीं था.
नहर के किनारे पड़ी थी लाश सीसीटीवी फुटेज की जांच करते हुए पुलिस को पता चला कि डीएसपी दलबीर सिंह देओल रात करीब साढ़े 12 बजे एक ऑटो से वर्कशॉप चौक के पास उतरे. इसके बाद देर रात करीब 1 बज कर 20 मिनट पर उनकी लाश नहर के किनारे पड़ी मिली. यानी उनका कत्ल इन्हीं 50 मिनट के दौरान हुआ. अब पुलिस इस 50 मिनट की पहेली को सुलझाने की कोशिश कर रही है. खास बात ये है कि डीएसपी देओल दिव्यांग थे. शूगर की वजह से उनकी एक टांग काटनी पड़ी थी. जिसकी वजह से वो ठीक से चल नहीं पाते थे.

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