
धुंआधार प्रचार, मोदी जैसा लोकप्रिय नेता... फिर भी लोकसभा चुनाव में BJP को क्यों नहीं मिल सका बहुमत?
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2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे देश को वापस गठबंधन के युग में ले आए हैं. अब बीजेपी को अपनी दो प्रमुख सहयोगी पार्टियों नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) को खुश रखना होगा.
लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले चुनावी विश्लेषकों और पंडितों से लेकर खुद भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत का अनुमान जताया था. लेकिन पार्टी चुनाव में बहुमत तक हासिल नहीं कर सकी. वह बहुमत हासिल करने के लिए 32 सीटों से चूक गई और इस बार सिर्फ 240 सीट ही जीतने में कामयाब रही. इस तरह 2019 के चुनाव की तुलना में बीजेपी को 63 सीटों का नुकसान हुआ है.
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 293 सीटें मिली हैं जबकि दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है. 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे देश को वापस गठबंधन के युग में ले आए हैं. अब बीजेपी को अपनी दो प्रमुख सहयोगी पार्टियों नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) को साधकर चलना होगा.
नरेंद्र मोदी जैसा लोकप्रिय नेता जिन्होंने दावा किया था कि बीजेपी 370 से अधिक सीटें जीतेगी. सवाल है कि वह पार्टी को उस लक्ष्य के आधे रास्ते तक कैसे नहीं पहुंचा सका? यह चुनाव इसका बेहतरीन उदाहरण है कि किस तरह एक विपक्ष जो शुरुआत से बिखरा-बिखरा और चुनावों को लेकर तैयार नजर नहीं आ रहा था, वह इतनी बड़ी चुनौती दे सका.
क्या खोया- क्या पाया?
बीजेपी ने 2019 के चुनावों में देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में 81 और 65 फीसदी सीटें जीतकर बेहतरीन प्रदर्शन किया था. बीजेपी के सहयोगी यहां 14 और 23 सीटें जीतने में कामयाब रहे थे. बीजेपी को राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड में कम सीटों की उम्मीद थी.
लेकिन बीजेपी को ये भी उम्मीद थी कि वह पूर्व में पश्चिम बंगाल और ओडिशा, दक्षिण में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश, उत्तर में उत्तर प्रदेश में ज्यादा सीटें जीतकर इसकी भरपाई कर लेगी. पार्टी को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बूते इन सीटों को रिकवर करने की भी उम्मीद थी. प्रधानमंत्री ने दक्षिणी राज्यों में पार्टी का खाता खोलने की उम्मीद में तमिलनाडु और केरल में जोर-शोर से प्रचार किया.

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