
देश में कोरोना से राहत, 125 जिलों में ही मिल रहे 100 से ज्यादा केस, रिकवरी रेट में हो रही बढ़ोतरी
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देश में अब कोरोना वायरस महामारी से कुछ राहत मिलने लगी है. हालांकि, तीसरी लहर को देखते हुए अब भी सरकार सचेत है और जरूरी कदम उठा रही है. पहले की तुलना में दैनिक मामलों में तेजी से कमी आई है.
देश में कई दिनों तक कहर बरपाने वाली कोरोना की दूसरी लहर की गति अब धीमी पड़ती जा रही है. अब देश में सिर्फ 125 ही जिले हैं, जहां पर रोजाना 100 से ज्यादा कोरोना के मरीज मिल रहे हैं, जबकि मई में ऐसे जिलों की संख्या पांच सौ से भी अधिक थी. कोरोना के मामलों में कमी आने की वजह से मृतकों का आंकड़ा भी घट गया है, जबकि रिकवरी रेट में बढ़ोतरी हुई है. In the week of 4th May, 531 districts of the country were reporting more than 100 cases. In the week of 2nd June, it fell down to 262 districts. Right now only 125 districts in the country are reporting more than 100 cases: Lav Agarwal, Joint Secretary, Health Ministry#COVID19 pic.twitter.com/nKJf96iiDl
झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

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